जानकारी के अनुसार पाल कॉलोनी की घरेलू बिजली लाइन टूट जाने के कारण पूरे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति पिछले चार दिनों से बंद थी। लगातार अंधेरे में रहने से लोगों को पीने के पानी घरेलू कामकाज और गर्मी से राहत पाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा था। सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्राओं को हो रही थी जो परीक्षा और नियमित पढ़ाई की तैयारी कर रही थीं। बिजली नहीं होने के कारण रात में पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही थी और मोबाइल फोन तक चार्ज नहीं हो पा रहे थे जिससे ऑनलाइन पढ़ाई और जरूरी संपर्क भी बाधित हो रहे थे।
प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने बताया कि वे समय पर बिजली बिल जमा करती हैं लेकिन इसके बावजूद विभाग उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा था। उन्होंने कई बार बिजली वितरण कंपनी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन भी किए लेकिन किसी ने समस्या का समाधान नहीं किया। उनका आरोप था कि कई अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे थे और शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। इसी उपेक्षा से नाराज होकर छात्राओं ने सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया।
गुरुवार रात प्रियंका लोधी सहित दर्जनभर छात्राएं बिजली कंपनी के कार्यालय पहुंचीं और मुख्य मार्ग पर बैठकर चक्काजाम शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने साफ कहा कि जब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होगी तब तक वे सड़क से नहीं हटेंगी। अचानक हुए प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और करीब आधे घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। स्थानीय लोगों ने भी छात्राओं की मांगों का समर्थन करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन भी सक्रिय हो गया। एसडीएम ममता शाक्य के निर्देश पर पुलिस और बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें जल्द समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। इसके साथ ही बिजली कर्मचारियों ने तत्काल टूटी लाइन की मरम्मत का काम शुरू कर दिया। जैसे ही मरम्मत कार्य शुरू हुआ छात्राओं ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग ने शुरुआती शिकायतों पर ही कार्रवाई कर दी होती तो लोगों को चार दिनों तक अंधेरे में नहीं रहना पड़ता और सड़क पर उतरकर विरोध करने की नौबत भी नहीं आती। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम लोगों की समस्याओं का समाधान आखिर शिकायतों से होगा या फिर प्रदर्शन के बाद ही प्रशासन और विभाग जागेंगे।