विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति में होने वाली बिजली की खपत को ‘वैम्पायर पावर’, ‘फैंटम लोड’ या ‘नो-लोड पावर’ कहा जाता है। आधुनिक स्मार्टफोन चार्जर के भीतर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और ट्रांसफार्मर लगातार सक्रिय रहते हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत बिजली की आपूर्ति की जा सके। इसी कारण चार्जर बिना किसी डिवाइस के भी सीमित मात्रा में ऊर्जा का उपयोग करता रहता है।
एक सामान्य गुणवत्ता वाला मोबाइल चार्जर बिना फोन के प्लग में ऑन रहने पर लगभग 0.1 से 0.5 वॉट प्रति घंटे तक बिजली खर्च करता है। यदि ऐसा चार्जर पूरे वर्ष लगातार 24 घंटे प्लग में लगा रहे तो उसकी कुल खपत लगभग 1 से 4 यूनिट बिजली तक पहुंच सकती है। मौजूदा औसत घरेलू बिजली दरों के आधार पर इसका वार्षिक खर्च लगभग 10 से 30 रुपये के बीच बैठता है। यानी केवल एक चार्जर की वजह से बिजली बिल में बहुत बड़ा अंतर नहीं आता।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि बिजली की मामूली खपत से अधिक चिंता सुरक्षा को लेकर होनी चाहिए। लंबे समय तक लगातार प्लग में लगे रहने से चार्जर के अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने की संभावना रहती है। लगातार गर्म होने के कारण चार्जर की आयु भी कम हो सकती है।
यदि चार्जर निम्न गुणवत्ता का हो या सुरक्षा मानकों के अनुरूप न बना हो, तो जोखिम और बढ़ जाता है। बिजली के वोल्टेज में अचानक उतार-चढ़ाव की स्थिति में ऐसे चार्जर ओवरहीट हो सकते हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए केवल बिजली बचाने के बजाय घरेलू सुरक्षा के लिहाज से भी चार्जर को उपयोग के बाद प्लग से निकाल देना बेहतर माना जाता है।
घर में छोटे बच्चों और पालतू जानवरों की मौजूदगी में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। यदि चार्जर की केबल नीचे लटक रही हो और स्विच ऑन हो, तो बच्चे या पालतू जानवर उसके संपर्क में आ सकते हैं। इससे हल्का विद्युत झटका लगने या अन्य दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि एक अकेले चार्जर से बिजली बिल पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन घर में टीवी, सेट-टॉप बॉक्स, वाई-फाई राउटर, माइक्रोवेव, कंप्यूटर और अन्य कई उपकरण भी स्टैंडबाय मोड में बिजली की खपत करते रहते हैं। ऐसे में यदि सभी अनावश्यक उपकरणों के स्विच बंद रखने की आदत विकसित की जाए तो लंबे समय में बिजली की बचत के साथ-साथ घरेलू सुरक्षा भी बेहतर हो सकती है। इसलिए उपयोग समाप्त होने के बाद चार्जर को प्लग से निकालना एक छोटी लेकिन उपयोगी और सुरक्षित आदत मानी जाती है।