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वैश्विक नौसैनिक मंच पर भारत की बढ़ी रणनीतिक भागीदारी, RIMPAC 2026 में P-8I विमान के साथ भारतीय नौसेना करेगी संयुक्त युद्धाभ्यास

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने दुनिया के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास RIMPAC 2026 में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराते हुए P-8I समुद्री गश्ती विमान को हवाई भेज दिया है। इस अभ्यास में भारत की मौजूदगी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, साझेदारी और संयुक्त सैन्य सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित यह अभ्यास विभिन्न देशों की नौसेनाओं को आधुनिक युद्धक परिस्थितियों में एक साथ प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करता है।

अमेरिकी प्रशांत बेड़े के नेतृत्व में आयोजित होने वाला RIMPAC इस वर्ष अपने 30वें संस्करण में आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन 24 जून से 31 जुलाई तक हवाई द्वीप समूह और उसके आसपास किया जा रहा है। इस बार अभ्यास की थीम ‘Partners: Integrated and Ready’ रखी गई है, जिसका उद्देश्य सहभागी देशों के बीच बेहतर समन्वय, साझा रणनीति और संयुक्त परिचालन क्षमता को विकसित करना है।

भारतीय नौसेना का P-8I विमान समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियानों, खुफिया जानकारी जुटाने तथा लंबी दूरी की समुद्री गश्त के लिए अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म माना जाता है। इस विमान की भागीदारी से भारत को समुद्री निगरानी, सूचना साझा करने और सहयोगी नौसेनाओं के साथ संयुक्त संचालन का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। साथ ही इससे समुद्री क्षेत्र में अंतर-संचालन क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

इस वर्ष आयोजित अभ्यास में 30 देशों की नौसेनाएं और सैन्य बल हिस्सा ले रहे हैं। इसमें 30 से अधिक युद्धपोत, पांच पनडुब्बियां, 200 से अधिक सैन्य विमान, 15 देशों की थल सेनाएं तथा लगभग 30 हजार सैन्यकर्मी शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर होने वाला यह अभ्यास वैश्विक समुद्री सुरक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है, जहां विभिन्न देशों की सेनाएं आधुनिक युद्धक और मानवीय अभियानों का संयुक्त प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं।

अभ्यास के दौरान प्रतिभागी देश समुद्र और जमीन दोनों क्षेत्रों में कई प्रकार के अभियानों का अभ्यास करेंगे। इनमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, हवाई रक्षा, मिसाइल और तोप अभ्यास, समुद्री सुरक्षा अभियान, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, समुद्री डकैती विरोधी अभियान, बारूदी सुरंग निष्क्रियकरण, विस्फोटक आयुध प्रबंधन, गोताखोरी तथा बचाव अभियान जैसे कई महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य विभिन्न सेनाओं के बीच समन्वय और संचालन क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है।

सैन्य अधिकारियों का मानना है कि जटिल और वास्तविक परिस्थितियों में संयुक्त अभ्यास से सहभागी देशों की युद्धक तैयारी बेहतर होती है। इसके माध्यम से सैन्य बल आधुनिक रणनीतियों, तकनीकी प्रणालियों और परिचालन प्रक्रियाओं को साझा करते हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में मिलकर प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने की क्षमता विकसित होती है। यह अभ्यास समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन को भी मजबूती प्रदान करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सामरिक महत्व को देखते हुए भारत की सक्रिय भागीदारी उसके समुद्री हितों और क्षेत्रीय सहयोग की नीति को और मजबूत करती है। RIMPAC 2026 में भारतीय नौसेना की उपस्थिति न केवल उसकी पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि यह वैश्विक समुद्री सुरक्षा, मुक्त एवं समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र और मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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