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दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग पर ईरान का बड़ा कदम, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से वसूलेगा सर्विस फीस, मित्र देशों को मिल सकती है राहत

नई दिल्ली । ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर सर्विस फीस लगाने की दिशा में औपचारिक तैयारी शुरू कर दी है। तेहरान का कहना है कि यह व्यवस्था समुद्री सुरक्षा और जहाजों को दी जाने वाली सेवाओं के बदले लागू की जाएगी। इसके लिए ईरान ओमान के साथ मिलकर नई प्रणाली तैयार कर रहा है। इस घोषणा के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार की नजरें इस प्रस्तावित व्यवस्था पर टिक गई हैं।

बीजिंग में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान चीन में ईरान के राजदूत अब्दोलरेजा रहमानी फजली ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाजों से लिया जाने वाला शुल्क टोल टैक्स नहीं बल्कि सर्विस फीस होगा, जिसे सुरक्षा, निगरानी और समुद्री सेवाओं के बदले वसूला जाएगा।

ईरानी पक्ष का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट का एक हिस्सा उसके क्षेत्रीय जलक्षेत्र में आता है। ऐसे में जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराना, उनकी आवाजाही की निगरानी करना और भारी समुद्री यातायात से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों का प्रबंधन करना उसकी जिम्मेदारी है। इसी आधार पर सर्विस फीस को उचित और वैध बताया गया है।

हालिया क्षेत्रीय संघर्ष के बाद व्यावसायिक जहाजों को लगभग 60 दिनों तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इस समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई थी। अब यह अंतरिम व्यवस्था समाप्त होने के बाद ईरान स्थायी नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि शुल्क की दर, लागू होने की तारीख और किन देशों पर यह व्यवस्था किस रूप में लागू होगी, इस बारे में अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि हालिया संकट के दौरान जिन देशों ने उसका समर्थन किया, उन्हें नई व्यवस्था में विशेष रियायत मिल सकती है। राजदूत ने कहा कि कठिन समय में साथ खड़े रहने वाले देशों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। हालांकि भारत सहित किसी भी देश का नाम लेकर यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन देशों को राहत मिलेगी और किस प्रकार की छूट दी जाएगी।

भारत के संदर्भ में भी फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि भारतीय जहाजों को इस सर्विस फीस से छूट मिलेगी या उन्हें इसका भुगतान करना होगा। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत पर इस नई व्यवस्था का क्या प्रभाव पड़ेगा। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही विभिन्न देशों और शिपिंग कंपनियों पर पड़ने वाले वास्तविक असर का आकलन किया जा सकेगा।

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन इसी रास्ते से होता है। इसलिए इस मार्ग से जुड़ा कोई भी प्रशासनिक या शुल्क संबंधी बदलाव अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लागत, ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। आने वाले दिनों में ईरान और ओमान द्वारा जारी किए जाने वाले अंतिम दिशा-निर्देशों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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