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भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, पीएम मोदी के दौरे पर टैगोर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी खास पुस्तक की जाएगी भेंट


नई दिल्ली ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के दौरे पर रहेंगे, जहां उनके स्वागत की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह यात्रा भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जकार्ता सहित कई प्रमुख स्थानों पर स्वागत की तैयारियों के बीच इस दौरे का सांस्कृतिक महत्व भी विशेष रूप से चर्चा में है।

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में द्विपक्षीय बैठकों के साथ भारतीय समुदाय से संवाद भी शामिल है। इस दौरान व्यापार, निवेश, समुद्री सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक साझेदारी जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को नई गति देने की दिशा में इस यात्रा को अहम माना जा रहा है।

इस दौरे की एक विशेष उपलब्धि यह भी होगी कि प्रधानमंत्री मोदी को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा पर आधारित एक विशेष पुस्तक भेंट की जाएगी। यह वर्ष टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जिससे इस यात्रा का सांस्कृतिक महत्व और बढ़ गया है। पुस्तक में टैगोर की यात्रा, उनके अनुभवों और भारत तथा इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।

बताया गया है कि इस पुस्तक पर पिछले दो वर्षों से शोध और लेखन का कार्य किया गया। शताब्दी वर्ष के अवसर पर इसके पूर्ण होने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। लेखक का मानना है कि यह पुस्तक दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।

रवींद्रनाथ टैगोर ने लगभग एक सदी पहले इंडोनेशिया की यात्रा के दौरान वहां की संस्कृति, कला और परंपराओं का गहन अध्ययन किया था। उन्होंने जावा, बाली, सुमात्रा, जकार्ता और अन्य क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए भारतीय सांस्कृतिक प्रभावों को करीब से देखा। विशेष रूप से रामायण और महाभारत से जुड़े सांस्कृतिक स्वरूपों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया था।

अपनी यात्रा के दौरान टैगोर ने प्रसिद्ध बोरोबुदुर मंदिर का भी भ्रमण किया और वहां की सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। उन्होंने स्थानीय कला, नृत्य और पारंपरिक शिल्प में गहरी रुचि दिखाई। उनकी इस यात्रा का प्रभाव बाद में भारतीय सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों में भी दिखाई दिया, जहां दक्षिण-पूर्व एशियाई कला और परंपराओं को विशेष महत्व दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल कूटनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को भी नई पहचान देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ साझा सांस्कृतिक विरासत पर आधारित यह पहल दोनों देशों के रिश्तों को भविष्य में और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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