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रवि बिश्नोई का फ्लॉप शो बना हार की बड़ी वजह, स्पिन अटैक और टीम चयन पर उठे गंभीर सवाल


नई दिल्ली । इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में टीम इंडिया को चार विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के कई कारण रहे लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा युवा लेग स्पिनर रवि बिश्नोई के प्रदर्शन की हो रही है। उन्होंने अपने चार ओवर के स्पेल में बिना कोई विकेट लिए 60 रन खर्च किए और तीन नो बॉल फेंक दीं। टी20 जैसे छोटे प्रारूप में किसी स्पिनर का इतना महंगा साबित होना और लगातार नो बॉल करना भारत की गेंदबाजी रणनीति पर बड़े सवाल खड़े करता है।

भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 190 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही और शुरुआती ओवरों में दो विकेट जल्दी गिर गए। ऐसे समय भारतीय टीम के पास मैच पर पकड़ मजबूत करने का सुनहरा मौका था लेकिन बीच के ओवरों में रवि बिश्नोई की गेंदबाजी ने मेजबान टीम को मुकाबले में वापसी का रास्ता दे दिया।

सबसे निर्णायक मोड़ उनके 17वें ओवर में आया। इस ओवर में उन्होंने तीन नो बॉल फेंकी जिससे इंग्लैंड को लगातार फ्री हिट मिली। बल्लेबाज जैकब बेथेल ने इन अतिरिक्त मौकों का पूरा फायदा उठाया और तेजी से रन बटोरकर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। टी20 क्रिकेट में अनुशासन बेहद अहम माना जाता है और किसी स्पिनर से ऐसी गलती की उम्मीद नहीं की जाती।

बिश्नोई की गेंदबाजी शैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्हें लेग स्पिनर माना जाता है लेकिन उनकी गेंदबाजी मुख्य रूप से गुगली पर आधारित रहती है। जब बल्लेबाज उनकी गुगली को पढ़ लेते हैं तब उनके पास न तो ज्यादा टर्न का विकल्प बचता है और न ही बल्लेबाजों को चकमा देने वाली विविधता दिखाई देती है। मैनचेस्टर में इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने उनकी रणनीति को आसानी से समझ लिया और खुलकर रन बनाए।

हाल के समय में आईपीएल में भी उनका प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय रहा है। लखनऊ सुपर जायंट्स से अलग होने के बाद वह राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा बने लेकिन वहां भी उनकी भूमिका पूरी तरह स्थिर नहीं रही। ऐसे में भारतीय टीम में लगातार मौके मिलने को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञ और प्रशंसक सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि टीम प्रबंधन को प्रदर्शन के आधार पर स्पष्ट चयन नीति अपनानी चाहिए।

हालांकि केवल एक खराब मैच के आधार पर किसी खिलाड़ी के करियर पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। रवि बिश्नोई युवा गेंदबाज हैं और उन्होंने पहले भी कई मैचों में टीम को जीत दिलाई है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रभावी बने रहने के लिए उन्हें अपनी पारंपरिक लेग ब्रेक पर काम करना होगा और गेंदबाजी में अधिक विविधता लानी होगी। साथ ही नो बॉल जैसी बुनियादी गलतियों से बचना भी बेहद जरूरी होगा।

भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 सीरीज अभी बाकी है और टीम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगले मुकाबले में स्पिन विभाग में बदलाव किया जाए या फिर बिश्नोई पर भरोसा बरकरार रखा जाए। आने वाले मैचों में उनका प्रदर्शन ही तय करेगा कि वह आलोचनाओं का जवाब मैदान पर किस तरह देते हैं।

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