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सूरत और अहमदाबाद की पहचान से आगे निकला कोयम्बटूर, जानिए क्यों तमिलनाडु का यह शहर आज भारत की असली 'टेक्सटाइल सिटी' कहलाता है

नई दिल्ली। भारत में कपड़ा उद्योग का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। प्राचीन काल से ही यहां सूती और रेशमी वस्त्रों का निर्माण होता रहा है। समय के साथ इस उद्योग ने आधुनिक रूप लिया और देश के अलग-अलग शहर कपड़ा उत्पादन के प्रमुख केंद्र बनते गए। कभी कानपुर को टेक्सटाइल कैपिटल कहा जाता था तो अहमदाबाद और सूरत भी लंबे समय तक वस्त्र उद्योग के बड़े केंद्र रहे। हालांकि वर्तमान समय में तमिलनाडु का कोयम्बटूर भारत की ‘टेक्सटाइल सिटी’ के रूप में सबसे मजबूत पहचान बना चुका है।

कोयम्बटूर को यह पहचान केवल कपड़ा उत्पादन की वजह से नहीं मिली, बल्कि यहां विकसित हुए संपूर्ण टेक्सटाइल उद्योग ने इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक शहरों में शामिल कर दिया है। शहर में बड़ी संख्या में स्पिनिंग मिल्स, टेक्सटाइल यूनिट्स, गारमेंट निर्माण केंद्र और प्रोसेसिंग प्लांट संचालित हैं। यही कारण है कि यह भारत में सूती धागे के सबसे बड़े उत्पादन केंद्रों में गिना जाता है।

इस शहर की भौगोलिक परिस्थितियां भी कपड़ा उद्योग के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। यहां का मौसम, औद्योगिक वातावरण और प्रशिक्षित श्रमिकों की उपलब्धता उत्पादन क्षमता को लगातार मजबूत बनाती है। वर्षों से विकसित औद्योगिक ढांचे ने कोयम्बटूर को टेक्सटाइल क्षेत्र में स्थिर और भरोसेमंद पहचान दिलाई है। यही वजह है कि देश की कई प्रमुख वस्त्र कंपनियां यहां से अपना उत्पादन संचालित करती हैं।

कोयम्बटूर की सबसे बड़ी विशेषता इसका एकीकृत टेक्सटाइल नेटवर्क है। यहां कपास की खरीद से लेकर धागा तैयार करने, बुनाई, रंगाई, प्रिंटिंग और तैयार परिधान बनाने तक की पूरी प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो जाती है। इससे उत्पादन लागत नियंत्रित रहती है और उद्योग की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। इस मॉडल ने शहर को देश के सबसे संगठित टेक्सटाइल क्लस्टरों में शामिल कर दिया है।

शहर में तैयार होने वाला कॉटन यार्न देश के अनेक राज्यों की वस्त्र इकाइयों तक पहुंचता है। उच्च गुणवत्ता वाले सूती धागे की वजह से यहां का उत्पादन गारमेंट उद्योग और निर्यात आधारित कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा निटवियर, फैब्रिक, होम टेक्सटाइल्स, तौलिये और अन्य तैयार वस्त्रों का भी बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाता है।

कोयम्बटूर का योगदान केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है। यहां निर्मित टेक्सटाइल उत्पादों की आपूर्ति कई विदेशी बाजारों में भी होती है। सूती धागा, तैयार कपड़े, टेक्निकल टेक्सटाइल और होम फर्निशिंग उत्पादों का निर्यात इस शहर की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देता है। इसी वजह से यह भारत के प्रमुख निर्यात केंद्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है।

टेक्सटाइल उत्पादन के साथ-साथ कोयम्बटूर मशीन निर्माण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां टेक्सटाइल मशीनरी, मोटर्स, स्पेयर पार्ट्स और इंजीनियरिंग उपकरणों का भी बड़े पैमाने पर निर्माण होता है। इससे वस्त्र उद्योग को स्थानीय स्तर पर आवश्यक मशीनें और तकनीकी सहायता आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

भारत का कपड़ा उद्योग आज भी देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। कृषि के बाद यह सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले क्षेत्रों में शामिल है और निर्यात में भी इसकी उल्लेखनीय हिस्सेदारी है। इसी मजबूत औद्योगिक व्यवस्था, व्यापक उत्पादन क्षमता और निर्यात में अहम योगदान के कारण कोयम्बटूर को आज भारत की ‘टेक्सटाइल सिटी’ के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है।

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