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62 करोड़ का फ्लायओवर बना मुसीबत, इंदौर के सत्यसाई चौराहे पर गड्ढों और कीचड़ में रेंग रहा ट्रैफिक


इंदौर  इंदौर के सबसे व्यस्त यातायात मार्गों में शामिल सत्यसाई चौराहा इन दिनों लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। यहां मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की देखरेख में 62 करोड़ रुपए की लागत से छह लेन फ्लायओवर का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के तीन महीने बाद भी केवल करीब 40 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। निर्माण की धीमी रफ्तार और एजेंसी की लापरवाही का खामियाजा अब रोजाना हजारों वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है।

बारिश शुरू होने के बाद हालात और भी खराब हो गए हैं। निर्माणाधीन क्षेत्र की सर्विस रोड जगह-जगह उखड़ चुकी है और गहरे गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। देवास नाका से विजय नगर की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहन चालक हर दिन जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर हैं। सत्यसाई स्कूल के आसपास सड़क की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों के फिसलने तथा दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा लगातार बना हुआ है।

एबी रोड से बसंत विहार कॉलोनी की ओर जाने वाले मार्ग पर भी हालात बेहतर नहीं हैं। यहां 15 से 20 फीट लंबे और करीब दो फीट गहरे गड्ढे सड़क पर बने हुए हैं। निर्माण सामग्री और गिट्टी सड़क पर बिखरी होने से वाहन चालक संतुलन खो रहे हैं। कई जगह चैंबर के ढक्कन भी धंस चुके हैं जिससे हादसे की आशंका और बढ़ गई है।

फ्लायओवर की गर्डर लॉन्चिंग का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है लेकिन इसके बावजूद सर्विस रोड का बड़ा हिस्सा अब भी बैरिकेड्स से बंद पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण एजेंसी समय रहते सड़क की मरम्मत कर बैरिकेड्स हटा देती तो यातायात के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध हो जाती और रोज लगने वाले जाम से काफी राहत मिल सकती थी।

स्थिति को और गंभीर बना रही है सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग। विजय नगर से देवास नाका की ओर जाने वाले संकरे मार्ग पर कई दुकानों के सामने वाहन खड़े रहने से यातायात प्रभावित हो रहा है। बारिश के दौरान यह समस्या और विकराल रूप ले लेती है तथा लंबा जाम लग जाता है।

एमपीआरडीसी ने अप्रैल में दावा किया था कि मानसून से पहले सर्विस रोड को कंक्रीट से विकसित कर चौड़ा किया जाएगा और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत भी पूरी कर दी जाएगी। हालांकि जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। न तो सर्विस रोड का काम पूरा हुआ और न ही खराब सड़कों की प्रभावी मरम्मत की गई।

15 मार्च 2024 को शुरू हुई इस परियोजना का लगभग 60 प्रतिशत काम अब भी अधूरा है। ऐसे में शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है कि यदि निर्माण की रफ्तार इसी तरह धीमी रही तो फ्लायओवर के पूरा होने में अभी और लंबा समय लग सकता है। तब तक लोगों को बारिश, गड्ढों, कीचड़ और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से लगातार जूझना पड़ेगा।

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