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अंकारा में वैश्विक सुरक्षा पर बड़ा मंथन, नाटो समिट में ट्रंप का फोकस रक्षा बजट, हथियार सहयोग और रूस-यूक्रेन युद्ध पर रहेगा

नई दिल्ली। वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच नाटो का आगामी शिखर सम्मेलन तुर्किए की राजधानी अंकारा में आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी सबसे अधिक चर्चा में है। सम्मेलन के दौरान उनका मुख्य फोकस रक्षा खर्च बढ़ाने, सदस्य देशों के बीच जिम्मेदारियों के संतुलित बंटवारे और रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने पर रहेगा। इसके साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध और यूरोप की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं।

ट्रंप सम्मेलन के दौरान तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को लेकर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा ट्रंप यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से भी अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में क्षेत्रीय संघर्षों, सुरक्षा सहयोग और भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

समिट के कार्यक्रम के अनुसार ट्रंप नाटो नेताओं के आधिकारिक स्वागत समारोह, सामूहिक फोटो सत्र और कार्यकारी बैठकों में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष रक्षा और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा करेंगे। समापन से पहले ट्रंप मीडिया को संबोधित करेंगे और उसके बाद अपनी निर्धारित द्विपक्षीय बैठकों को पूरा करेंगे।

इस बार सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण विषय नाटो देशों द्वारा रक्षा बजट बढ़ाने की प्रतिबद्धता माना जा रहा है। पिछले वर्ष सदस्य देशों ने अपनी सकल घरेलू उत्पाद का पांच प्रतिशत रक्षा क्षेत्र पर खर्च करने की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया था। अब इस लक्ष्य की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। अमेरिका चाहता है कि सभी सदस्य देश अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए तय समयसीमा के भीतर रक्षा निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि करें।

अमेरिकी पक्ष का मानना है कि यूरोप के कई देशों ने रक्षा खर्च बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए हैं। पोलैंड, नॉर्डिक देशों और बाल्टिक क्षेत्र के देशों को इस मामले में अग्रणी बताया जा रहा है, जबकि जर्मनी भी निर्धारित लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इसके बावजूद अमेरिका का मानना है कि सभी सदस्य देशों को समान रूप से जिम्मेदारी निभानी होगी ताकि गठबंधन का सामूहिक सुरक्षा ढांचा और अधिक मजबूत बन सके।

सम्मेलन में रक्षा उत्पादन बढ़ाने और सैन्य उपकरणों के संयुक्त निर्माण पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। अमेरिका का उद्देश्य सहयोगी देशों के साथ आधुनिक हथियार प्रणालियों, रक्षा तकनीक और उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है। माना जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान रक्षा क्षेत्र में कई बड़े निवेश और सैन्य खरीद से जुड़े समझौतों की घोषणा भी हो सकती है, जिनकी कुल कीमत अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध भी सम्मेलन के सबसे अहम विषयों में रहेगा। ट्रंप और जेलेंस्की की प्रस्तावित बैठक में युद्ध समाप्त करने के संभावित विकल्पों और कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा होने की संभावना है। अमेरिका का कहना है कि युद्ध को जल्द समाप्त करना मानवीय और वैश्विक सुरक्षा दोनों दृष्टि से आवश्यक है। बैठक के बाद ट्रंप की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बातचीत हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था तेजी से बदली है और इसी कारण नाटो अपने रणनीतिक ढांचे में व्यापक बदलाव कर रहा है। ऐसे समय में अंकारा समिट को गठबंधन की भविष्य की रक्षा नीति, सामूहिक सुरक्षा और सदस्य देशों की साझा जिम्मेदारियों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण सम्मेलन माना जा रहा है।

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