जानकारी के अनुसार सोमवार शाम करीब चार बजे गांव के कुछ बच्चे क्रेशर की खदान के पास खेल रहे थे। खेलते समय उनकी गेंद गहरे पानी से भरी खदान में गिर गई। गेंद निकालने के प्रयास में निखरा और उसकी बहन नम्रता खदान के किनारे पहुंचे लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरे पानी में गिर गए। देखते ही देखते दोनों बच्चे डूबने लगे और मदद के लिए चीखने लगे।
बच्चों की आवाज सुनते ही उनकी बुआ सायराबाई पारदी दौड़कर मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए दोनों बच्चों को बचाने के लिए तुरंत खदान में छलांग लगा दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक बच्चे को पकड़कर बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन दूसरे बच्चे को बचाने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया। खदान का पानी काफी गहरा होने के कारण वह भी खुद को संभाल नहीं सकीं और तीनों कुछ ही पलों में पानी में समा गए।
घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस तथा प्रशासन को सूचना दी गई। ब्यावरा सिटी थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों की मदद से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों को पानी से बाहर निकाला गया और तुरंत सिविल अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया है। मामले में मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दुर्घटना पानी से भरी गहरी खदान के किनारे खेलते समय हुई।
यह घटना एक बार फिर परित्यक्त और पानी से भरी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी खदानों के आसपास मजबूत घेराबंदी चेतावनी बोर्ड और निगरानी की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है ताकि बच्चे अनजाने में वहां न पहुंच सकें। अभिभावकों को भी बच्चों को खतरनाक और गहरे जलाशयों के पास अकेले खेलने से रोकना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी कई अनमोल जिंदगियों को बचा सकती है।