नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, जिसमें आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘योगिनी एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। पौराणिक ग्रंथों और पद्मपुराण के अनुसार, इस व्रत को विधि-विधान के साथ करने से व्रती को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत को सच्चे मन से रखने पर व्यक्ति के समस्त संचित पाप नष्ट हो जाते हैं। इस वर्ष एकादशी तिथि दो दिनों में विभाजित होने के कारण आम जनमानस में व्रत की सही तारीख को लेकर काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिसे पंचांग की गणनाओं के आधार पर स्पष्ट कर दिया गया है।
द्रिक पंचांग के विश्लेषण के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि की शुरुआत 10 जुलाई, शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर होने जा रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 11 जुलाई, शनिवार को सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर होगा। इस बार विशेष स्थिति यह बन रही है कि दोनों ही दिन एकादशी तिथि सूर्योदय के समय पूर्ण रूप से व्याप्त नहीं है। शनिवार 11 जुलाई को सुबह 5 बजकर 22 मिनट के बाद ही द्वादशी तिथि का प्रारंभ हो जाएगा, जिससे ज्योतिषीय गणना के अनुसार 11 जुलाई को एकादशी तिथि का क्षय माना गया है। शास्त्रों में वर्णित नियमों के अनुसार, जब दोनों दिन सूर्यकाल में एकादशी तिथि व्याप्त न हो, तब पहले दिन ही व्रत रखना श्रेयस्कर होता है।
इस पंचांगीय नियम के आधार पर सभी गृहस्थ लोगों के लिए 10 जुलाई को ही योगिनी एकादशी का व्रत रखना पूरी तरह से मान्य और शास्त्रसम्मत होगा। दूसरी ओर, वैष्णव संप्रदाय से जुड़े श्रद्धालु और संत समाज के लोग अगले दिन यानी 11 जुलाई को इस एकादशी का व्रत अनुष्ठान कर सकते हैं। तिथि के इस विभाजन के कारण दोनों ही पक्षों के लिए व्रत के पारण का समय भी अलग-अलग निर्धारित किया गया है, जिसका कड़ाई से पालन करना व्रत की पूर्णता के लिए आवश्यक माना जाता है।
जो श्रद्धालु 10 जुलाई, शुक्रवार को योगिनी एकादशी का उपवास रखेंगे, वे अगले दिन 11 जुलाई को अपने व्रत का पारण करेंगे। गृहस्थों के लिए 11 जुलाई को पारण का शुभ समय दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 36 मिनट तक निर्धारित किया गया है। इसके विपरीत, जो वैष्णव जन 11 जुलाई, शनिवार को एकादशी का व्रत रखेंगे, उनके लिए पारण की समय अवधि अगले दिन यानी 12 जुलाई की सुबह 5 बजकर 32 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। व्रत खोलने के इस नियत समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत का पालन करने वाले श्रद्धालुओं को दशमी तिथि से ही कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। इसके तहत दशमी तिथि यानी 9 जुलाई की शाम से ही केवल सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और भोजन में लहसुन, प्याज, बैंगन, मूंग तथा मसूर की दाल जैसी वस्तुओं का त्याग कर देना चाहिए। व्रत के मुख्य दिन बाल, नाखून काटना और बाल धोना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। व्रतियों को इस दिन अन्न का पूरी तरह त्याग कर केवल फलाहार करना चाहिए और पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु की आराधना में समय बिताना चाहिए।