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'सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक लड़ाई का मंच नहीं'— करूर मामले में डीएमके को झटका, मुख्यमंत्री विजय की यात्रा पर रोक लगाने से इनकार

नई दिल्ली । करूर भगदड़ मामले से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को राहत देते हुए उनकी प्रस्तावित करूर यात्रा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने इस मामले में दायर याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मंच नहीं बन सकती और राजनीतिक दलों को अपने मतभेद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी मुख्यमंत्री की सार्वजनिक गतिविधियों या पीड़ित परिवारों से मिलने जैसे कार्यक्रमों में हस्तक्षेप करना न्यायालय का कार्यक्षेत्र नहीं है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित मामले की प्राथमिकी में मुख्यमंत्री विजय का नाम आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है, इसलिए केवल आशंकाओं के आधार पर उनकी यात्रा पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता।

मुख्यमंत्री विजय करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात करने तथा प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और अन्य राहत उपायों की घोषणा करने वाले हैं। इसी प्रस्तावित दौरे को लेकर आपत्ति जताते हुए याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस तरह की गतिविधियों से मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

अदालत ने इस दलील पर असहमति जताते हुए कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को अपने प्रतिद्वंद्वी के बयानों या कार्यक्रमों पर आपत्ति है तो उसका जवाब राजनीतिक मंच पर दिया जाना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विवादों को अदालत में लाने की प्रवृत्ति उचित नहीं है और इससे न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि करूर भगदड़ मामले की जांच पहले से ही स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से आगे बढ़ रही है। ऐसे में जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने संबंधी किसी भी आरोप का मूल्यांकन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा, न कि राजनीतिक आशंकाओं के आधार पर। अदालत ने संकेत दिया कि जांच एजेंसियां अपने दायित्वों का निर्वहन स्वतंत्र रूप से करेंगी।

इस मामले में पहले से जांच की निगरानी के लिए न्यायिक व्यवस्था लागू है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि जब जांच निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार चल रही है, तब केवल राजनीतिक मतभेदों के आधार पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को राजनीतिक मामलों में न्यायिक संयम का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अदालत ने दोहराया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका समाधान न्यायालय के बजाय सार्वजनिक विमर्श और राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री विजय का करूर दौरा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होने का रास्ता साफ हो गया है, जबकि करूर भगदड़ मामले की जांच अपनी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।

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