मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा कि मानहानि और पर्सनैलिटी राइट्स के बीच बहुत बारीक अंतर होता है। कई मामलों में मानहानि से जुड़े विवादों में व्यक्तित्व अधिकारों का पहलू भी शामिल हो सकता है। इसलिए अदालत को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और रिकॉर्ड का सावधानीपूर्वक परीक्षण करना आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में आया कि याचिका के साथ उन यूआरएल के स्क्रीनशॉट संलग्न नहीं किए गए थे जिनके माध्यम से कथित आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित होने का दावा किया गया है। इस पर अदालत ने अभिषेक शर्मा की ओर से पेश अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करें जिसमें सभी विवादित पोस्ट और यूआरएल से संबंधित स्क्रीनशॉट शामिल हों तथा वे याचिका में दी गई सूची से मेल खाते हों।
सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिका में दिए गए आठ यूआरएल में से दो उपलब्ध नहीं थे और उन तक पहुंच संभव नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी कहा कि एक यूआरएल पर मौजूद सामग्री पैपराजी द्वारा अपलोड की गई प्रतीत होती है और प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट नहीं है कि वह पर्सनैलिटी राइट्स के दायरे में आती है या नहीं। इस पर अभिषेक शर्मा की ओर से दलील दी गई कि संबंधित सामग्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के माध्यम से तैयार की गई थी। साथ ही यह भी कहा गया कि एक पोस्ट में उनकी मैनेजर को उनकी गर्लफ्रेंड के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो गलत और भ्रामक है।
याचिका में अभिषेक शर्मा ने अदालत से अनुरोध किया है कि उनके व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की जाए और सोशल मीडिया तथा अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कथित रूप से भ्रामक, मानहानिकारक और एआई से तैयार सामग्री को हटाने के निर्देश दिए जाएं। उनका कहना है कि ऐसी सामग्री उनकी प्रतिष्ठा और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा सकती है।
फिलहाल अभिषेक शर्मा भारतीय क्रिकेट टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर हैं और पांच मैचों की टी20 श्रृंखला का हिस्सा हैं। अब इस मामले में सभी की नजर 9 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी, जब अदालत अतिरिक्त दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्यवाही करेगी।