महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उसे दहेज को लेकर लगातार प्रताड़ित किया गया। ससुराल पक्ष मायके से पैसे लाने का दबाव बनाता था और विरोध करने पर मानसिक तथा शारीरिक रूप से परेशान करता था। महिला का कहना है कि उसके एक लाख रुपए और सोने-चांदी के जेवर भी ससुराल वालों ने अपने कब्जे में रख लिए हैं और अब उन्हें लौटाने से इनकार कर रहे हैं।
महिला के अनुसार, उसे और उसके पति को जिस मकान में रहने का अधिकार है, उसी मकान से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। उसने दावा किया कि मकान का निर्माण उसके पति और ससुर की कमाई से हुआ था, लेकिन रजिस्ट्री सास के नाम कराई गई। अब परिवार के लोग उन्हें घर से निकालना चाहते हैं। इतना ही नहीं, उनके उपयोग में आने वाले कॉमन शौचालय पर भी ताला लगा दिया गया है, जिससे उन्हें रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
महिला ने बताया कि 13 अप्रैल 2026 को उसके साथ मारपीट की घटना हुई थी। उसने पहले फिजिकल थाना और बाद में महिला थाना में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन उसके अनुसार पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। न्याय नहीं मिलने से निराश होकर वह पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंची, लेकिन वहां भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया।
महिला के पति ने भी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि वे पिछले दो दिनों से पुलिस अधीक्षक कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका दावा है कि जिस मकान से उन्हें निकाला जा रहा है, उसके निर्माण में उनकी मेहनत और कमाई का बड़ा योगदान है। लगातार अनदेखी से परेशान होकर उनकी पत्नी ने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने महिला और उसके पति से बातचीत की। महिला को समझाकर शांत कराया गया और उसका आवेदन लेकर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई। पुलिस का कहना है कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर घरेलू विवादों, दहेज प्रताड़ना और शिकायतों के समय पर निराकरण की आवश्यकता को उजागर करती है। यदि पारिवारिक विवादों और शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई हो, तो ऐसे गंभीर और आत्मघाती कदम उठाने की नौबत आने से रोका जा सकता है।