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आर्थिक तंगी में फिल्मों से टीवी का रुख करने वाली नवनीत निशान की बदली किस्मत, ‘तारा’ ने दिलाई घर-घर पहचान और ‘टीवी की श्रीदेवी’ का खिताब

नई दिल्ली । अभिनेत्री नवनीत निशान ने अपने अभिनय करियर के शुरुआती संघर्ष और टेलीविजन से मिली सफलता को याद करते हुए बताया कि आर्थिक तंगी के दौर में लिया गया एक फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। उन्होंने कहा कि फिल्मों में काम करने के बावजूद उन्हें वह पहचान नहीं मिली, जो बाद में लोकप्रिय टीवी धारावाहिक ‘तारा’ ने दिलाई। इसी शो ने उन्हें घर-घर तक पहुंचाया और दर्शकों के बीच एक अलग पहचान स्थापित की।

नवनीत निशान ने बताया कि जब उन्हें ‘तारा’ का प्रस्ताव मिला, तब वह पहले से कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं। उस समय फिल्म उद्योग में यह धारणा प्रचलित थी कि जो कलाकार टेलीविजन की ओर रुख करता है, उसके लिए फिल्मों के अवसर सीमित हो जाते हैं। इसी कारण वह शुरुआत में इस प्रस्ताव को लेकर असमंजस में थीं। हालांकि आर्थिक परिस्थितियों ने उन्हें यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया और उन्होंने धारावाहिक स्वीकार कर लिया।

उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में उन्हें यह जानकारी दी गई थी कि वह किसी दूसरे किरदार को निभाएंगी। बाद में जब धारावाहिक का प्रचार सामने आया, तब उन्हें पता चला कि वह मुख्य भूमिका में हैं और पूरा शो उनके किरदार के इर्द-गिर्द बनाया गया है। उनके अनुसार उस समय उन्हें लगा कि उन्हें पूरी जानकारी पहले नहीं दी गई थी। हालांकि बाद में यही भूमिका उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि बन गई और दर्शकों ने उन्हें खुले दिल से स्वीकार किया।

अभिनेत्री ने बताया कि धारावाहिक के निर्देशक ने शुरुआत में ही कहा था कि कुछ समय बाद पूरा देश उन्हें पहचानने लगेगा। उस समय उन्हें इस बात पर विश्वास नहीं हुआ क्योंकि इससे पहले फिल्मों में काम करने के बावजूद उन्हें व्यापक लोकप्रियता नहीं मिली थी। लेकिन शो के प्रसारण के कुछ ही महीनों में हालात पूरी तरह बदल गए। उन्होंने कहा कि लोग उन्हें उनके वास्तविक नाम से कम और ‘तारा’ के नाम से अधिक पहचानने लगे थे। यह लोकप्रियता उनके लिए अप्रत्याशित थी और इसी ने उनके करियर को नई दिशा दी।

नवनीत निशान ने कहा कि उस दौर में उनके किरदार का आधुनिक व्यक्तित्व और छोटा हेयरस्टाइल दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। उन्होंने बताया कि लोग उनके लुक की नकल करने लगे थे और उन्हें ‘टीवी की श्रीदेवी’ तथा 90 के दशक की आधुनिक महिला जैसे विशेषण मिलने लगे। उनके अनुसार यह केवल एक धारावाहिक नहीं था, बल्कि उस समय बदलती सामाजिक सोच और महिलाओं की नई पहचान का भी प्रतीक बन गया था।

उन्होंने 90 के दशक के टेलीविजन उद्योग की कार्यशैली को याद करते हुए कहा कि उस समय आज जैसी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। कलाकार बिना मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिताते थे। शूटिंग के दौरान सभी कलाकार एक ही कमरे में बैठते, बातचीत करते, एक-दूसरे की मदद करते और पूरे परिवार की तरह काम करते थे। उन्होंने कहा कि वैनिटी वैन जैसी सुविधाएं भी नहीं होती थीं और कलाकार अपने कपड़े स्वयं लेकर आते थे, जिससे टीम के बीच आत्मीयता और सहयोग का माहौल बना रहता था।

नवनीत निशान का मानना है कि उस दौर के धारावाहिक आज भी दर्शकों की यादों में इसलिए जीवित हैं क्योंकि उनमें कहानी, किरदार और भावनात्मक जुड़ाव को विशेष महत्व दिया जाता था। उन्होंने कहा कि समय बदलने के साथ मनोरंजन के कई नए माध्यम सामने आए हैं, लेकिन ‘तारा’ जैसा प्रभाव आज भी लोगों की स्मृतियों में कायम है। उनके अनुसार एक कलाकार के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यही होती है कि वर्षों बाद भी दर्शक उसके निभाए गए किरदार को याद रखें।

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