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तकनीकी गड़बड़ी से ई-कैबिनेट व्यवस्था प्रभावित, मुख्यमंत्री मंत्रियों को बताएंगे नर्मदा समझौते की पूरी जानकारी


भोपाल । भोपाल में बुधवार को होने वाली मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक से पहले तकनीकी गड़बड़ी ने प्रशासनिक व्यवस्था की परीक्षा ले ली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में प्रस्तावित कैबिनेट बैठक से पहले ई-कैबिनेट पोर्टल अचानक काम करना बंद कर गया जिससे मंत्रियों और उनके स्टाफ को बैठक का एजेंडा समय पर उपलब्ध नहीं हो सका। डिजिटल व्यवस्था पर आधारित कैबिनेट प्रक्रिया में आई इस बाधा के कारण सचिवालय स्तर पर देर रात तक हलचल बनी रही और तकनीकी टीम को पोर्टल को दोबारा चालू करने के लिए लगाया गया।

मुख्य सचिव सचिवालय की ओर से बाद में आधिकारिक सूचना जारी कर बताया गया कि तकनीकी कारणों से ई-कैबिनेट पोर्टल फिलहाल उपलब्ध नहीं है और विशेषज्ञों की टीम लगातार इसे ठीक करने में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि समस्या दूर होते ही संबंधित दस्तावेज और एजेंडा मंत्रियों को उपलब्ध करा दिए जाएंगे ताकि बैठक निर्धारित समय पर सुचारु रूप से संचालित हो सके।

आज की कैबिनेट बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय नर्मदा परियोजना से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हाल ही में दो दिवसीय दिल्ली दौरे से लौटे हैं जहां उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया। इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सरदार सरोवर बांध और उससे जुड़े मुआवजा विवाद पर अंतिम सहमति बनी। मुख्यमंत्री इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी मंत्रियों के साथ साझा करेंगे और बताएंगे कि किन परिस्थितियों में मध्यप्रदेश को गुजरात से सात हजार करोड़ रुपए से अधिक का दावा छोड़ना पड़ा तथा राज्य को गुजरात को लगभग 550 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा।

कैबिनेट बैठक में केवल नर्मदा परियोजना ही नहीं बल्कि आगामी विधानसभा मानसून सत्र की रणनीति पर भी चर्चा होगी। 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलने वाले विधानसभा सत्र के लिए सरकार लगभग एक दर्जन विधेयक तैयार कर रही है। इन प्रस्तावित विधेयकों को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य विभिन्न प्रशासनिक सुधारों और विकास योजनाओं को कानूनी आधार प्रदान करना है ताकि उनकी प्रभावी क्रियान्विति सुनिश्चित हो सके।

बैठक में पहले अनुपूरक बजट को भी स्वीकृति दिए जाने की संभावना है। इसके साथ ही वर्ष 2031 तक विभिन्न विभागों की संचालित योजनाओं को जारी रखने संबंधी प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। इन योजनाओं के माध्यम से अधोसंरचना विकास शिक्षा स्वास्थ्य ग्रामीण विकास सिंचाई और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं को निरंतर गति देने की तैयारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शासन की डिजिटल प्रणाली जितनी सुविधाजनक है उतनी ही उसकी तकनीकी मजबूती भी आवश्यक है। ई-कैबिनेट जैसी व्यवस्था का उद्देश्य कागजरहित प्रशासन को बढ़ावा देना और निर्णय प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाना है। ऐसे में तकनीकी बाधाएं शासन की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि समस्या का शीघ्र समाधान कर लिया जाएगा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए इसके लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

आज होने वाली कैबिनेट बैठक में लिए जाने वाले फैसलों पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी क्योंकि नर्मदा परियोजना से जुड़े निर्णयों के साथ विधानसभा सत्र की तैयारियां और विकास योजनाओं को लेकर सरकार की आगामी रणनीति भी इसी बैठक से तय होगी।

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