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बोरोबुदुर के बाद प्रम्बानन तक बढ़ा भारत का संरक्षण अभियान, इंडोनेशिया के साथ विरासत संरक्षण सहयोग हुआ और मजबूत

नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को नई मजबूती देते हुए योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने संयुक्त रूप से इस परियोजना का शुभारंभ किया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संचालित यह परियोजना दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा करने के साथ-साथ साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा किया। इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वयं उनके साथ मंदिर परिसर पहुंचे। दोनों नेताओं ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की संरक्षण एवं पुनर्स्थापन परियोजना की प्रतीकात्मक पट्टिका का अनावरण कर इस सहयोग की औपचारिक शुरुआत की। इस मौके को भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।

प्रम्बानन मंदिर परिसर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था और इसे इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। यह मंदिर भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित है तथा हिंदू त्रिमूर्ति की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। स्थापत्य कला, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक विरासत के कारण यह परिसर विश्वभर के शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

यह संरक्षण परियोजना वर्ष 2025 में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच बनी सहमति का परिणाम है। उस समय भारत द्वारा प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन में तकनीकी सहयोग देने पर सहमति बनी थी। अब इस परियोजना की शुरुआत के साथ दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को व्यावहारिक रूप दिया गया है।

भारत को ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इससे पहले भी दक्षिण-पूर्व एशिया के कई महत्वपूर्ण विरासत स्थलों के संरक्षण कार्य में योगदान दे चुका है। इंडोनेशिया के प्रसिद्ध बोरोबुदुर मंदिर परिसर का विस्तृत दस्तावेजीकरण भी भारतीय विशेषज्ञों द्वारा किया गया था। इसी अनुभव के आधार पर अब प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन में भी भारत अपनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा।

यह पहल केवल एक संरक्षण परियोजना नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक संबंधों और पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का भी प्रतीक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन और शोध के नए अवसर भी विकसित होंगे।

भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध समुद्री व्यापार, धर्म, कला और स्थापत्य परंपराओं के माध्यम से विकसित हुए हैं। प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना इन ऐतिहासिक रिश्तों को आधुनिक सहयोग के साथ जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इस पहल से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को नई गति मिलने और साझा विरासत के संरक्षण में दीर्घकालिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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