पंचांग के अनुसार आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 9 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 45 मिनट से होगा जबकि इसका समापन 10 जुलाई को दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर होगा। चूंकि व्रत के लिए उदया तिथि का विशेष महत्व माना जाता है इसलिए योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई को करना धार्मिक दृष्टि से श्रेष्ठ और मान्य रहेगा।
इस वर्ष योगिनी एकादशी कई शुभ और कल्याणकारी संयोगों के साथ आ रही है। इस दिन सुकर्मा योग और धृति योग का निर्माण हो रहा है जो धार्मिक कार्यों और भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। इतना ही नहीं शुक्रवार के दिन एकादशी होने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की संयुक्त कृपा प्राप्त होने का दुर्लभ अवसर भी बन रहा है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से लक्ष्मी नारायण की पूजा करने वाले भक्तों के जीवन में धन समृद्धि सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।
योगिनी एकादशी का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है बल्कि इसे आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व भी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति के जाने अनजाने में हुए पापों का नाश होता है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख समृद्धि तथा खुशहाली बनी रहती है। ऐसा भी कहा गया है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने वाला व्यक्ति सांसारिक सुखों का आनंद लेने के बाद अंत में मोक्ष की प्राप्ति करता है।
व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को प्रातःकाल स्नान के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाकर पीले फूल तुलसी दल फल और पंचामृत अर्पित करना चाहिए। विष्णु सहस्रनाम श्री विष्णु चालीसा और एकादशी व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दिनभर सात्विक आचरण रखते हुए भगवान के नाम का स्मरण करना चाहिए और जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र या धन का दान करने से भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
योगिनी एकादशी व्रत का पारण 11 जुलाई शनिवार को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 5 बजकर 32 मिनट से सुबह 8 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार द्वादशी तिथि के भीतर ही व्रत का पारण करना आवश्यक माना गया है। समय पर पारण करने से ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
धार्मिक दृष्टि से योगिनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आत्मसंयम भक्ति सेवा और सकारात्मक जीवन का संदेश देने वाला पावन पर्व है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन किया जाए तो भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से जीवन में सुख समृद्धि और मानसिक शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।