ताजा बाजार आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत सप्ताह के अंत तक 2,976 रुपये घटकर 1,43,368 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। सप्ताह की शुरुआत में इसका भाव 1,46,344 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इसी प्रकार 22 कैरेट सोने की कीमत घटकर 1,31,325 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई, जबकि सप्ताह की शुरुआत में यह 1,34,051 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने में भी गिरावट देखने को मिली और इसका भाव 1,09,758 रुपये से घटकर 1,07,526 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
साप्ताहिक कारोबार के दौरान सोने में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। सप्ताह का उच्चतम स्तर 6 जुलाई के सुबह के सत्र में 1,45,583 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि सबसे निचला स्तर 8 जुलाई के शाम के सत्र में 1,42,350 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इससे स्पष्ट है कि बाजार में पूरे सप्ताह अस्थिरता बनी रही और निवेशकों को लगातार बदलते भावों का सामना करना पड़ा।
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान चांदी 13,468 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती होकर 2,20,390 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। सप्ताह की शुरुआत में इसका भाव 2,33,858 रुपये प्रति किलोग्राम था। कारोबार के दौरान चांदी का उच्चतम स्तर 6 जुलाई के शाम के सत्र में 2,33,158 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जबकि सबसे निचला स्तर 10 जुलाई के शाम के सत्र में 2,20,390 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।
सर्राफा बाजार में कीमतों का निर्धारण दिन में दो बार सुबह और शाम के कारोबारी सत्र के आधार पर किया जाता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार में आए बदलावों का सीधा असर घरेलू कीमतों पर भी देखने को मिलता है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर होने वाली आर्थिक और राजनीतिक घटनाओं पर निवेशकों की लगातार नजर बनी रहती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इस सप्ताह सोने का भाव लगभग 4,100 डॉलर प्रति औंस और चांदी का भाव करीब 60 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा पश्चिम एशिया में विकसित हो रहे हालात ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है। इन परिस्थितियों का प्रभाव कीमती धातुओं के कारोबार पर भी पड़ा, जिसके चलते घरेलू बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और निवेशकों की धारणा के आधार पर बुलियन बाजार की दिशा तय होने की संभावना जताई जा रही है।