नई दिल्ली ।नोएडा में एक बार फिर बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाओं में कथित लापरवाही एक युवक की जान पर भारी पड़ गई। सेक्टर-58 में जलभराव के बीच खुले नाले में गिरने से 27 वर्षीय इंजीनियर आर्यन की मौत ने शहर में सार्वजनिक सुरक्षा, जल निकासी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के कई हादसे हो चुके हैं और प्रत्येक घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दावे किए गए थे।
मूल रूप से फर्रुखाबाद निवासी आर्यन रोज की तरह अपने कार्यालय जा रहे थे। रातभर हुई बारिश के कारण सड़क पर काफी जलभराव था, जिससे नाले के ऊपर बने स्लैब पूरी तरह पानी में छिप गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक स्थान पर स्लैब पहले से टूटा हुआ था, लेकिन पानी भरे होने के कारण वह दिखाई नहीं दे रहा था। जैसे ही आर्यन वहां से गुजरे, उनका संतुलन बिगड़ा और वे सीधे गहरे नाले में गिर गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें सुरक्षित नहीं निकाला जा सका और बाद में उनका शव बरामद हुआ।
घटना के बाद परिजनों ने संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते टूटे स्लैब बदले गए होते, खुले नालों को सुरक्षित किया गया होता और जलभराव की समस्या का प्रभावी समाधान किया गया होता, तो इस दुर्घटना से बचा जा सकता था। परिजनों ने मामले में उचित कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की है।
यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है। इसी वर्ष सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन परियोजना के पास बारिश के पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से युवा इंजीनियर युवराज की मौत हुई थी। उस समय भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर सवाल उठे थे। घटना के बाद जांच समिति गठित करने, खुले गड्ढों की बैरिकेडिंग करने और नियमित निरीक्षण कराने जैसे निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल बने रहे।
इसके कुछ समय बाद एक अन्य हादसे में एमिटी विश्वविद्यालय के एक छात्र की भी निर्माणाधीन स्थल पर पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से जान चली गई थी। उस घटना के बाद भी निर्माण स्थलों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, सुरक्षा घेराबंदी सुनिश्चित करने और जलभराव वाले गड्ढों को तत्काल भरने की बात कही गई थी। इसके बावजूद ताजा घटना यह संकेत देती है कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार अभी भी दिखाई नहीं दे रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में खुले नाले, क्षतिग्रस्त स्लैब, निर्माणाधीन स्थलों पर असुरक्षित गड्ढे और बारिश के दौरान गंभीर जलभराव आज भी आम समस्या बने हुए हैं। उनका आरोप है कि शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कई स्थानों पर समय पर मरम्मत और रखरखाव नहीं किया जाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। उनका मानना है कि केवल हादसों के बाद निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित निगरानी और प्रभावी अमल भी उतना ही आवश्यक है।
आर्यन की मौत ने एक बार फिर यह प्रश्न सामने ला दिया है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं के बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा के मौसम में संवेदनशील स्थानों की पहचान, नियमित निरीक्षण, क्षतिग्रस्त संरचनाओं की तत्काल मरम्मत और प्रभावी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं मजबूत किए बिना ऐसे हादसों को रोकना कठिन होगा। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।