जम्मू में आयोजित ‘दिल्ली चलो’ रैली को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के लिए 50 से अधिक लोगों को आमंत्रण भेजा था, लेकिन केवल एक नाम को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने लोगों को निमंत्रण भेजा गया, तब केवल मीरवाइज उमर फारूक के नाम को ही प्रमुखता से क्यों उठाया गया। उनके अनुसार यह पूरी बहस वास्तविक राजनीतिक मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा और मीडिया के एक वर्ग पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ मंचों पर इस निमंत्रण को इस तरह प्रस्तुत किया गया, मानो पार्टी ने किसी अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा देने का प्रयास किया हो। उन्होंने कहा कि यह व्याख्या तथ्यों के अनुरूप नहीं है और इससे केवल भ्रम पैदा किया जा रहा है। उनके अनुसार राज्य का दर्जा बहाल करने जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होने के बजाय राजनीतिक विमर्श को दूसरे मुद्दों की ओर मोड़ा जा रहा है।
उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार के उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियां अब समाप्त हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह दावा सही है, तो फिर उसी आधार पर किसी व्यक्ति को अलगाववादी बताकर विवाद खड़ा करना विरोधाभासी प्रतीत होता है। उनका कहना था कि दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं और इस विषय पर स्पष्टता आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी पार्टी का प्रमुख लक्ष्य जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है, ताकि इस मांग को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके। उनके अनुसार यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक अपेक्षाओं से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू में आयोजित रैली में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है। उनके अनुसार जनता इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और राजनीतिक दलों को भी इसी विषय पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि लोकतांत्रिक माध्यमों से उठाई जा रही यह मांग आगे भी मजबूती के साथ जारी रहेगी।
दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले इस निमंत्रण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर नेशनल कॉन्फ्रेंस इसे राज्य का दर्जा बहाल करने के अभियान का हिस्सा बता रही है, वहीं विपक्षी दल इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण बना रह सकता है।