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स्वास्थ्य सेवाओं में बदल रहा भारत का भविष्य राजनाथ बोले इलाज के साथ रोकथाम और रिसर्च पर भी बराबर जोर


नई दिल्ली । भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है और अब सरकार का फोकस केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि उनकी रोकथाम पर भी समान रूप से दिया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि बीते वर्षों में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक आत्मनिर्भर सुलभ किफायती आधुनिक और जनकेंद्रित बनी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा अनुसंधान और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में अभूतपूर्व प्रगति हुई है जिससे देश वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2017 से पहले राज्य में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे जबकि अब उनकी संख्या बढ़कर 81 हो चुकी है। इसके अलावा प्रदेश में दो एम्स भी संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब हर जिले में मेडिकल कॉलेज की परिकल्पना से भी आगे निकल चुका है और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार ने मेडिकल शिक्षा का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। आज भारत जीन चिकित्सा परमाणु चिकित्सा और अन्य आधुनिक तकनीकों के जरिए स्वास्थ्य संबंधी वैश्विक चुनौतियों का स्वदेशी समाधान तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कैंसर के इलाज में उपयोगी सीएआर टी सेल थेरेपी का दुनिया का सबसे सस्ता संस्करण भारत ने विकसित किया है जिससे यह उपचार अब आम लोगों की पहुंच में भी आ रहा है।

रक्षा मंत्री ने चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया के इलाज के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल परीक्षण किया जा चुका है। पुणे के वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के उपचार के लिए आधुनिक नैनो दवा विकसित की है। उन्होंने यह भी बताया कि तीन दशक बाद देश में पेनिसिलिन जी का उत्पादन दोबारा शुरू हुआ है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के माध्यम से चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को भी नई गति मिली है। इसी वर्ष भारत ने निमोनिया के इलाज में उपयोगी पहली स्वदेशी मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन भी विकसित की है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 में भारत ने पहली स्वदेशी एमआरआई मशीन विकसित कर स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने बताया कि देशभर में 19 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं जबकि आयुष्मान भारत योजना के जरिए करोड़ों लोगों को मुफ्त इलाज का लाभ मिल रहा है। पिछले बारह वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों ने आम नागरिकों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल इलाज उपलब्ध कराना नहीं बल्कि ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है जो हर नागरिक के लिए सुलभ किफायती और गुणवत्तापूर्ण हो। उन्होंने अंगदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताते हुए कहा कि डॉक्टरों की जिम्मेदारी केवल इलाज तक सीमित नहीं है बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने की भी है ताकि अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियां दूर हो सकें।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जीन संपादन कृत्रिम जीव विज्ञान और सटीक चिकित्सा जैसी नई तकनीकें स्वास्थ्य क्षेत्र का भविष्य तय कर रही हैं। ऐसे में डॉक्टरों को लगातार नई तकनीकों और शोध से खुद को अपडेट रखना होगा। उन्होंने नवस्नातक चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें बल्कि सेवा समर्पण और संवेदनशीलता के साथ समाज के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

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