भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी चियासीड्स को हृदय रोगों से बचाव के लिए एक प्रभावी प्राकृतिक विकल्प मानता है। मंत्रालय के अनुसार इन छोटे काले बीजों में मौजूद पोषक तत्व शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में ओमेगा थ्री फैटी एसिड पाए जाते हैं जो हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और रक्त संचार को बेहतर करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
चियासीड्स में मौजूद ओमेगा थ्री फैटी एसिड विशेष रूप से अल्फा लिनोलेनिक एसिड के रूप में पाए जाते हैं। यह फैटी एसिड शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। इससे धमनियों में जमा होने वाली चर्बी कम होती है और ब्लॉकेज का खतरा घटता है। यही कारण है कि चियासीड्स को हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में उपयोगी माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार जो लोग नियमित रूप से चियासीड्स का सेवन करते हैं उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित बना रहता है। इसके साथ ही ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी यह बीज सहायक होता है। चियासीड्स में पोटैशियम मैग्नीशियम और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है जो रक्त वाहिकाओं को आराम देने में मदद करती है। इससे दिल पर दबाव कम पड़ता है और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या नियंत्रित रहती है।
चियासीड्स का सेवन बेहद आसान है। रोजाना एक से दो चम्मच चियासीड्स पर्याप्त माने जाते हैं। इन्हें रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाया जा सकता है। इसके अलावा दही स्मूदी सलाद दलिया ओट्स या फलों के साथ मिलाकर भी सेवन किया जाता है। पानी में भिगोने पर चियासीड्स जेल जैसी बनावट बना लेते हैं जो पेट के लिए लाभकारी होती है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है।
इसके साथ ही चियासीड्स में फाइबर प्रोटीन कैल्शियम आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने ऊर्जा देने और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। संतुलित आहार के साथ चियासीड्स को दिनचर्या में शामिल करना सेहत के लिए एक समझदारी भरा कदम माना जाता है।