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महाशिवरात्रि पर 300 वर्षों में दूसरी बार 12 योग, काशी विश्वनाथ में श्रद्धालुओं के लिए विशेष तैयारी


नई दिल्ली । देवाधिदेव महादेव के विवाहोत्सव महाशिवरात्रि पर इस साल 12 दुर्लभ योग बनेंगे। तीन सौ वर्षों में यह दूसरा मौका है जब दस से अधिक योग एक साथ बन रहे हैं। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की उम्मीद है, इसलिए खास तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर लगातार 40 घंटे से अधिक समय तक खुला रहेगा। 15 फरवरी को भोर सवा दो बजे मंगला आरती के साथ कपाट खुलेंगे और 16 फरवरी की रात आरती के बाद बंद होंगे। 14 से 17 फरवरी तक स्पर्श और सुगम दर्शन पर रोक रहेगी।

इस बार के 12 योग
प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, सर्वार्थसिद्ध, साध्य, शिव, शुक्ल, चंद्रमंगल, त्रिग्रही, राज और ध्रुव। इससे पहले 2024 में शिवरात्रि पर 11 योग बने थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तिथि पर सृष्टि में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ और आदियोगी ने पार्वती के साथ गृहस्थ लीला रची थी।

ज्योतिषीय लाभ
ज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री के अनुसार, तीन सौ वर्षों में दूसरी बार बनने वाले ये योग मेष, मिथुन और सिंह राशि के जातकों के लिए विशेष लाभकारी होंगे। फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 15 फरवरी शाम 05:06 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी शाम 05:35 बजे समाप्त होगी।

योगों का क्रम:-
सुबह 05:45 से शिवयोग
06:43–09:37 सर्वार्थसिद्धि योग
11:19–11:23 प्रीति योग
12:17–13:54 आयुष्मान योग
17:07–17:53 सौभाग्य योग
19:47–20:34 शोभन योग
20:54–22:02 साध्य योग
22:42–23:58 शुक्ल योग
00:54–02:54 राज योग
02:57–05:53 ध्रुव योग

प्रहरवार अभिषेक और मंत्र जप:-
प्रथम प्रहर: दूध से अभिषेक, ऊँ ह्रीं ईशान्य नमः
द्वितीय प्रहर: दही से अभिषेक, ऊँ ह्रीं अघोराय नमः
तृतीय प्रहर: देशी घी से अभिषेक, ऊँ ह्रीं वामदेवाय नमः
चतुर्थ प्रहर: शहद से अभिषेक, ऊँ ह्रीं सध्योजाताय नमः

तीन राशि के जातकों को विशेष लाभ:-
मेष: वित्तीय लाभ, पदोन्नति, नेतृत्व क्षमता में विकास
मिथुन: पेशेवर जीवन में ऊँचाई, बड़े व्यापारिक अवसर
सिंह: धनागमन, अचल संपत्ति में वृद्धि

काशी विश्वनाथ मंदिर में आरती का क्रम:-
मंगला आरती: 02:15–03:15; 03:30 से दर्शन
मध्याह्न भोग आरती: 11:40–12:20

चारों प्रहर की आरती:-
प्रथम प्रहर: 21:00–00:30
द्वितीय प्रहर: 01:30–02:30
तृतीय प्रहर: 03:30–04:30
चतुर्थ प्रहर: 05:00–06:15

इस बार की महाशिवरात्रि अपने दुर्लभ 12 योगों और विशेष प्रहरवार आरती के कारण श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।

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