डॉ. याम्पोल्स्की का कहना है कि AI अब सिर्फ इंसानों की मदद करने वाला टूल नहीं रहेगा, बल्कि वह तेजी से इंसानों को रिप्लेस करने की दिशा में बढ़ रहा है। उनके मुताबिक ऐसा कोई भी इंसानी काम नजर नहीं आता, जिसे पूरी तरह ऑटोमेट न किया जा सके। जिस रफ्तार से AI विकसित हो रहा है, वह नौकरी बाजार में अभूतपूर्व उथल-पुथल ला सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि आईटी, कस्टमर सपोर्ट, डेटा एनालिसिस, कंटेंट क्रिएशन, अकाउंटिंग और यहां तक कि रिसर्च जैसे सेक्टर्स भी AI के प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में इंसानी भूमिका तेजी से कम हो सकती है।
डॉ. याम्पोल्स्की के अनुसार, वर्ष 2045 तक दुनिया एक ऐसे टेक्नोलॉजिकल मोड़ पर पहुंच सकती है, जहां से वापस लौटना संभव नहीं होगा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और AI के दीर्घकालिक प्रभावों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले बदलाव पिछले सभी इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन से बिल्कुल अलग और कहीं ज्यादा गहरे होंगे। AI सिर्फ नौकरियों को नहीं बदलेगा, बल्कि समाज की पूरी संरचना को प्रभावित करेगा।
उन्होंने यह भी आगाह किया कि तकनीक जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, वह रोजगार, अर्थव्यवस्था और इंसानी नियंत्रण को लेकर बड़े सवाल खड़े कर सकती है। डॉ. याम्पोल्स्की ने इसे ऐसा दौर बताया, जहां तकनीकी फैसले इंसानी फैसलों से कहीं आगे निकल सकते हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. याम्पोल्स्की लातविया के मूल निवासी हैं और वर्तमान में अमेरिका की लुइसविले यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। AI सेफ्टी और संभावित जोखिमों पर वे दुनिया के अग्रणी विशेषज्ञों में शामिल हैं और इस विषय पर 100 से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रकाशित कर चुके हैं।
उन्होंने दावा किया कि अगले पांच वर्षों में लगभग हर तरह के फिजिकल लेबर को ऑटोमेट किया जा सकता है। उनके मुताबिक हम एक ऐसी दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं, जहां बेरोज़गारी का स्तर पहले कभी नहीं देखा गया होगा। यह सिर्फ 10 या 20 फीसदी बेरोज़गारी की बात नहीं, बल्कि 99 फीसदी तक पहुंचने की आशंका है।
हालांकि डॉ. याम्पोल्स्की ने यह भी बताया कि भविष्य में कुछ नौकरियां बच सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे काम जहां इंसानी मौजूदगी जरूरी मानी जाती है, वे पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। उदाहरण के तौर पर, कुछ लोग व्यक्तिगत भरोसे या पसंद के कारण इंसानी अकाउंटेंट या सलाहकार रखना चाहेंगे। इसके अलावा हाथ से बनाए गए उत्पादों और कारीगरी का एक सीमित लेकिन खास बाजार बना रहेगा।उन्होंने यह भी कहा कि AI की निगरानी और रेगुलेशन से जुड़ी नौकरियां भविष्य में बनी रह सकती हैं, हालांकि लंबे समय में AI को पूरी तरह नियंत्रित कर पाना बेहद मुश्किल होगा।