साल 2013 के एक इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने अपनी उस पीड़ा को साझा करते हुए बताया था कि वह दौर उनके लिए बेहद अपमानजनक था। उनके दरवाजे पर हर दिन लेनदार पैसे मांगने आते थे। जो लोग कभी उनके साथ काम करने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते थे, मुसीबत के वक्त उन्होंने ही बिग बी के प्रति अनादर दिखाना शुरू कर दिया था। उस दौरान उन पर 55 लीगल केस दर्ज थे और उन्होंने स्वीकार किया कि कई लोगों ने उन्हें गुमराह करके गलत दस्तावेजों पर साइन भी करवा लिए थे, जिसका खामियाजा उन्हें अकेले भुगतना पड़ा।
इस टूटते हुए हौसले के बीच बिग बी को अपने पिता, महान कवि हरिवंश राय बच्चन की दो बातों ने संभाले रखा। पहली सीख थी मन का हो तो अच्छा, मन का न हो तो और भी अच्छा। इसका अर्थ था कि अगर चीजें आपकी योजना के अनुसार नहीं हो रही हैं, तो ईश्वर ने आपके लिए कुछ और भी बेहतर सोच रखा है। दूसरी अहम बात जो उनके पिता ने कही थी वह यह कि जब तक जीवन है, संघर्ष बना रहेगा। इन दो मंत्रों ने अमिताभ को हार मानने के बजाय लड़ने की शक्ति दी।
अमिताभ बच्चन की सेकेंड इनिंग की शुरुआत फिल्म मोहब्बतें और टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति से हुई, जिसने न केवल उनका कर्ज उतारा बल्कि उन्हें पहले से भी बड़ा स्टार बना दिया। आज उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि इंसान अपने पिता के आदर्शों और खुद के परिश्रम पर भरोसा रखे, तो वह राख से भी उठकर दोबारा अपना साम्राज्य खड़ा कर सकता है।