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गाजा संघर्ष: युद्धविराम के बावजूद हिंसा जारी, मानवाधिकार संगठनों ने जांच की मांग की..


नई दिल्ली। वाशिंगटन/गाजा। गाजा संघर्ष में हालिया रिपोर्टों ने इजराइल पर कथित रूप से ‘वैक्यूम’ या थर्मोबैरिक बम इस्तेमाल करने के आरोप लगाए हैं। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन आरोपों की गंभीरता पर ध्यान देते हुए जांच की मांग तेज कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार यह हथियार पहले हवा में ज्वलनशील कणों का बादल फैलाते हैं और फिर उसे विस्फोटित करते हैं, जिससे अत्यधिक ताप और दबाव उत्पन्न होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बंद या घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका असर व्यापक विनाशकारी होता है।

गाजा की सिविल डिफेंस एजेंसियों के अनुसार कई घटनाओं में शव तक नहीं मिले और हजारों लोग अभी भी लापता हैं। आधिकारिक युद्धविराम लागू होने के बावजूद हिंसा जारी है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, युद्धविराम के बाद भी सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इस स्थिति ने क्षेत्र में मानवीय संकट और सामाजिक अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।

मानवाधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि यदि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल हुआ, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन माना जा सकता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से तत्काल जांच की अपील की है। हालांकि इन आरोपों पर इजराइल की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से नहीं आई है।

संघर्ष के कारण गाजा का बुनियादी ढांचा व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के आकलनों के अनुसार बड़ी आबादी विस्थापन, भोजन और पानी की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रही है। राहत एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि युद्ध की लंबी अवधि का प्रभाव क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक संरचना पर गहरा पड़ेगा।

इसी बीच अमेरिका और इजराइल के शीर्ष नेतृत्व के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, मानवीय सहायता और युद्धविराम को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत भी हुई। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि चर्चा जारी है, लेकिन ठोस प्रगति की अभी पुष्टि नहीं हुई है। क्षेत्रीय स्थिरता, मानवाधिकारों की रक्षा और मानवीय सहायता वितरण इस समय अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

वैश्विक समुदाय इस पर नजर बनाए हुए है कि क्या गाजा में हथियारों के कथित इस्तेमाल की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। युद्धविराम के बावजूद जारी हिंसा और नागरिक हताहतों की संख्या ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है।

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