जानकारी के अनुसार जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद उपाध्याय को सूचना मिली थी कि गांव में नाबालिग लड़की की शादी कर दी गई है और विदाई की रस्म पूरी की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी जनपद पंचायत दतिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनीत त्रिपाठी और थाना उनाव की पुलिस टीम संयुक्त रूप से मौके पर पहुंची। हालांकि तब तक विदाई हो चुकी थी और बारात रवाना हो चुकी थी।
प्रशासनिक टीम ने बिना समय गंवाए विदाई के काफिले का पीछा किया। रास्ते में घेराबंदी कर लौटती बारात को रोका गया और दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में बालिका की उम्र कानूनी विवाह आयु से कम पाई गई। इसके बाद बालिका को तत्काल रेस्क्यू कर थाना उनाव लाया गया जहां आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई।
कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बार कार्रवाई का दायरा केवल परिजनों तक सीमित नहीं रखा गया बल्कि विवाह आयोजन में सहयोग देने वाले सभी पक्षों को भी जिम्मेदार माना गया है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत विवाह में भोजन बनाने वाले हलवाई पंडाल लगाने वाले टेंट संचालक और डीजे मालिक के खिलाफ भी विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर ने जिले के सभी टेंट हाउस संचालकों हलवाइयों डीजे ऑपरेटरों और पंडितों को सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने निर्देशित किया है कि भविष्य में किसी भी शादी की बुकिंग लेने से पहले वर-वधू के आयु संबंधी प्रमाण पत्र जैसे जन्म प्रमाण पत्र या अंकसूची का सत्यापन अनिवार्य रूप से करें। यदि किसी आयोजन में नाबालिग की शादी पाई गई तो सेवा प्रदाताओं को भी कानूनी कार्रवाई और जेल का सामना करना पड़ेगा।
प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से जिले में स्पष्ट संदेश गया है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। अधिकारियों ने आमजन से भी अपील की है कि ऐसी किसी भी सूचना को तत्काल प्रशासन तक पहुंचाएं ताकि समय रहते बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।