Mahakaushal Times

इनट्यूशन थॉट की ताकत कैसे अंदर की आवाज बदल सकती है आपकी किस्मत और फैसलों की दिशा


नई दिल्ली। जिंदगी में हम अक्सर ऐसे लोगों को देखते हैं जो बिना ज्यादा सोचे समझे भी बिल्कुल सटीक फैसला ले लेते हैं। खेल के मैदान से लेकर बिजनेस और कला की दुनिया तक कई सफल लोग कहते हैं कि वे अपनी अंदर की आवाज यानी इनट्यूशन थॉट पर भरोसा करते हैं। यही इनट्यूशन उन्हें सही समय पर सही निर्णय लेने की ताकत देती है। कई बार फैसले लेने के लिए हमारे पास कुछ सेकंड भी नहीं होते और वही पल हमारी दिशा तय कर देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इनट्यूशन थॉट होता क्या है और यह हमारी जिंदगी को कैसे बदल सकता है।

इनट्यूशन थॉट दरअसल दिमाग की वह क्षमता है जो अनुभव और भावनाओं के आधार पर तुरंत निर्णय लेने में मदद करती है। खेल जगत में इसका बेहतरीन उदाहरण बेसबॉल खिलाड़ियों में देखने को मिलता है। मेजर लीग बेसबॉल में गेंद की रफ्तार 90 मील प्रति घंटे से ज्यादा होती है और बल्लेबाज के पास केवल करीब 150 मिलीसेकेंड का समय होता है यह तय करने के लिए कि शॉट खेलना है या नहीं। उस समय सोचने का मौका नहीं होता वहां सिर्फ अनुभव और इनट्यूशन काम करती है। यही वजह है कि टॉप खिलाड़ियों के फैसले हमें सहज और नेचुरल लगते हैं।

लेकिन इनट्यूशन कोई जादुई शक्ति नहीं है जो केवल महान खिलाड़ियों या सफल लोगों के पास हो। शोध बताते हैं कि यह क्षमता हर इंसान में मौजूद होती है। 2016 में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार इनट्यूशन को अभ्यास और जागरूकता से मजबूत किया जा सकता है। न्यूरोसाइंस के मुताबिक हमारा दिमाग दो तरह की सोच पर काम करता है एनालिटिकल और इनट्यूटिव। एनालिटिकल सोच तर्क आंकड़ों और योजना पर आधारित होती है जबकि इनट्यूटिव सोच भावनाओं अनुभव और बड़ी तस्वीर को समझने पर आधारित होती है।

उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति घर खरीदने का फैसला ले रहा है तो एनालिटिकल सोच वाला व्यक्ति बजट स्कूल दूरी और सुविधाओं पर ध्यान देगा जबकि इनट्यूटिव सोच वाला यह महसूस करेगा कि उस जगह पर उसे कैसा लग रहा है क्या वह वहां खुद को सहज और खुश महसूस कर पा रहा है। दोनों सोच जरूरी हैं लेकिन कई बार तेजी से निर्णय लेने के लिए इनट्यूशन अहम भूमिका निभाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इनट्यूशन को मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी है खुद पर भरोसा। जब हम अपनी अंदर की आवाज को सुनना सीखते हैं और फैसलों के नतीजों पर विचार करते हैं तो हमारी निर्णय क्षमता बेहतर होती जाती है। अक्सर हमारे भीतर दो तरह की आवाजें होती हैं एक डर और घबराहट से जुड़ी और दूसरी शांत और स्थिर। जो आवाज आपको भीतर से शांति देती है वही सच्ची इनट्यूशन होती है।

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी कह चुके हैं कि इनट्यूशन हमारे पुराने बौद्धिक अनुभवों का परिणाम होती है। नियमित अभ्यास ध्यान सांस पर फोकस रचनात्मक गतिविधियां और तनाव में भी शांत रहने की आदत इनट्यूशन को मजबूत बनाती हैं।

आखिरकार इनट्यूशन थॉट कोई रहस्य नहीं बल्कि हमारे अनुभव और आत्मविश्वास का निचोड़ है। जब हम खुद को समझते हैं और अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेते हैं तो यही अंदर की आवाज हमें सही दिशा में आगे बढ़ने का साहस देती है और यही सफलता की असली कुंजी बन सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर