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महंगाई मापने का आधार बदला… नई सीरीज में 299 की जगह 358 वस्तुएं, ई-कॉमर्स-ओटीटी भी शामिल


नई दिल्ली।
खुदरा महंगाई (Retail Inflation) की गणना के लिए नई शृंखला (New Series) का आगाज गुरुवार को किया गया। इसके लिए आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 किया गया है। आधार वर्ष वह संदर्भ वर्ष होता है जिसे तुलना के लिए चुना जाता है। इसके माध्यम से यह आकलन किया जाता है कि कीमतों (Prices) में कितनी वृद्धि या कमी हुई है।


कितने बाजार और कस्बे शामिल किए गए?

नई सीरीज में 1,465 ग्रामीण बाजार और 1,395 शहरी बाजार शामिल हैं, जो 434 कस्बों में फैले हुए हैं। इसके अलावा, 25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 कस्बों में 12 ऑनलाइन बाजार भी शामिल किए गए हैं। ग्रामीण और शहरी बाजारों से मूल्य डेटा मासिक आधार पर एकत्र किया गया, जबकि ऑनलाइन कीमतें साप्ताहिक आधार पर ली गई हैं।

इसमें ऑनलाइन बाजार क्यों शामिल किए गए ?
25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 कस्बों में 12 ऑनलाइन बाजार शामिल किए गए हैं, ताकि ई-कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिकने वाली वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को दर्ज किया जा सके। इसके अलावा हवाई किराया, टेलीफोन और ओटीटी सेवाओं की कीमतें भी ऑनलाइन माध्यम से एकत्र की जा रही हैं।

क्या बदलाव हुआ ?
अखिल भारतीय स्तर पर भारित वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़कर 358 हो गई है। इनमें वस्तुओं की संख्या 259 से बढ़कर 308 और सेवाओं की संख्या 40 से बढ़कर 50 हो गई है।

मकान किराये के लिए आवासों का नमूना आकार क्या है?
किराया संग्रह के लिए कुल 19,039 आवासों की पहचान की गई है, जिनमें 15,715 शहरी और 3,324 ग्रामीण आवास शामिल हैं। चेन-आधारित सूचकांक के उपयोग को देखते हुए भविष्य में, उपलब्धता के अनुसार और आवास जोड़े जा सकते हैं। इसमें ग्रामीण आवास का भार 11.764% है, जिसमें आवास, पानी, बिजली, गैस और अन्य ईंधन शामिल हैं।

क्या हवाई किराए की कीमतों की गणना भी होगी?
– हवाई किराए की कीमतें प्रसिद्ध ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से एकत्र की जाती हैं।

क्या स्ट्रीमिंग सेवाओं की कीमतें भी शामिल?
– अमेजन प्रइम वीडियो, नेटफ्लिक्स, जियो हॉटस्टर, सोनी लिव जैसी सेवाओं की कीमतें सीधे सेवा प्रदाताओं की वेबसाइट्स से ऑनलाइन एकत्र की जाती हैं।

‘खाद्य एवं पेय पदार्थ’ के भार में कितना बदलाव हुआ ?
– यदि सीपीआई 2012 की वर्गीकरण प्रणाली अपनाई जाती, तो खाद्य एवं पेय पदार्थों का हिस्सा 45.86% से घटकर 40.10% हो जाता। नई वर्गीकरण संरचना के अनुसार इसका हिस्सा 36.75% है। यह बदलाव संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग के फ्रेमवर्क को अपनाने के कारण हुआ है।

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