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लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सम्मान और स्मरण


नई दिल्ली । आज 13 फरवरी 2026 को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने हमारे देश की महान स्वतंत्रता सेनानी कवयित्री तथा समाज सुधारक श्रीमती सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर गहरी श्रद्धा व्यक्त की। इस भावपूर्ण कार्यक्रम में राज्य सभा के उपसभापति श्री हरिवंश कई संसद सदस्य पूर्व सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और उन्होंने भी सरोजिनी नायडू को याद करते हुए उनके योगदान को सम्मान दिया।

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि सरोजिनी नायडू ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रखर भूमिका निभाई बल्कि उन्होंने अपनी कविताओं वक्तृत्व और महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य किया। उन्हें भारत कोकिला के नाम से भी संबोधित किया जाता है जो उनकी साहित्यिक प्रतिभा और देशभक्ति की भावना का प्रतीक है।

उपस्थित गणमान्य लोगों की मौजूदगी से सजी संविधान सदन की केंद्रीय कक्ष में पुष्पांजलि अर्पण की यह रस्म बेहद गंभीर और सम्मानपूर्वक संपन्न हुई। लोक सभा महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह ने भी श्रीमती सरोजिनी नायडू के चित्र पर श्रद्धांजलि दी जबकि कई सांसदों ने उनके जीवन विचारों और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला।

सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। वे एक प्रतिभाशाली वक्ता सुप्रसिद्ध कवयित्री और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थीं जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। उनके नेतृत्व लेखन और देशप्रेम ने महिलाओं के शिक्षा और सशक्तिकरण को एक नई दिशा प्रदान की। उन्होंने दिल्ली में लेडी इरविन कॉलेज फॉर विमेन की स्थापना की जिससे उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिला।

स्वतंत्रता के बाद श्रीमती सरोजिनी नायडू ने संयुक्त प्रांत अब उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल के रूप में भी सेवा की। उनका जीवन देश की सेवा के प्रति समर्पण और समाज की भलाई के लिए निरंतर प्रयास का आदर्श रहा है। वे महिलाओं के अधिकारों और समानता की प्रबल समर्थक थीं जिनके विचार आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

विशेष रूप से यह भी उल्लेखनीय है कि पहले भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 16 दिसंबर 1959 को संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में सरोजिनी नायडू के चित्र का अनावरण किया था जो उनके योगदान और स्मरण को स्थायी रूप से सम्मानित करता है।

इस अनुष्ठान में सदन के नेताओं ने उनके साहित्यिक सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए कहा कि सरोजिनी नायडू का जीवन और कार्य भारतीय जनता के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। इस कार्यक्रम ने न केवल उनके स्मरण को सम्मान दिया बल्कि यह याद दिलाया कि स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के प्रति उनके आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी हैं।

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