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CBSE का बड़ा निर्णय… 12वीं के रिजल्ट के बाद नहीं होगा Mark Verification… अब पूरी तरह डिजिटल जांची जाएंगी कॉपियां


नई दिल्ली।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) (Central Board of Secondary Education (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 (12th Board Exam 2026) को लेकर अहम निर्णय लिया है। इस बार 12वीं के परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्रों को अंक सत्यापन (मार्क वेरिफिकेशन) (Mark Verification) की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। बोर्ड ने तय किया है कि 2026 से 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल प्रणाली ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के जरिए किया जाएगा।

दरअसल, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) इस बार 12वीं के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के साथ पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराने जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इसके बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रहेगी। शुक्रवार को सीबीएसई अधिकारियों ने संबद्ध स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए आयोजित एक कार्यशाला में यह जानकारी दी। परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि 2026 में 12वीं की परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में ऑन स्क्रीन मार्किंग की जाएगी। डिजिटल मूल्यांकन की इस प्रक्रिया के बाद अंकों की गिनती में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रह जाएगी। ऐसे में छात्रों के लिए परिणाम घोषित होने के बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रह जाएगी।


10वीं का मूल्यांकन मैनुअल ही होगा

परीक्षा नियंत्रक भारद्वाज ने बताया कि बोर्ड इस बार सिर्फ 12वीं की परीक्षा के लिए यह सुविधा लागू कर रहा है। इस बार होने वाली दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में कॉपियों का मूल्यांकन ‘मैनुअल’ यानी शिक्षकों के द्वारा ही किया जाएगा।


इसलिए कराया जाता था अंक सत्यापन

पुरानी व्यवस्था में कई बार मानवीय भूलों के चलते अंक जुड़ने से रह जाते थे। परिणाम के बाद छात्र अंक सत्यापन को आवेदन करते थे, जिसके बाद कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन होता था।


क्या होती है ऑन स्क्रीन मार्किंग

ऑन स्क्रीन मार्किंग डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। इसमें उत्तर पुस्तिका को हाथों से चेक नहीं किया जाता। शिक्षक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका को कंप्यूटर पर चेक करेंगे। छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं पहले स्कैन की जाती हैं। इसके बाद ये कॉपियां सुरक्षित ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड होती हैं और शिक्षक कंप्यूटर पर उन्हें देखकर अंक देते हैं। इस सिस्टम में सॉफ्टवेयर खुद ही कुल अंक जोड़ देता है, जिससे टोटलिंग की गलती की संभावना खत्म हो जाती है। अभी तक कई बार हाथ से जोड़ने में गलती हो जाती थी, जिससे छात्रों को बाद में वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करना पड़ता था।


शिक्षक अब अपने स्कूल से ही जांच सकेंगे कॉपियां

इस नए सिस्टम की एक खास बात यह है कि शिक्षकों को अब कॉपी जांचने के लिए किसी मूल्यांकन केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने ही स्कूल में बैठकर, नियमित काम करते हुए कॉपियों का मूल्यांकन कर सकेंगे। इससे समय और यात्रा खर्च दोनों की बचत होगी और ज्यादा शिक्षक इस प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।


17 फरवरी से शुरू हो रही है परीक्षा

सीबीएसई की 12वीं और दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हो रही हैं। बोर्ड से भारत और दुनिया के 26 देशों में 31,000 से अधिक स्कूल संबद्ध हैं।

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