मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने महाशिवरात्रि की तैयारियों में जुटकर इंतजाम किए हैं। विशेष रूप से सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, पूजा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अनुमान है कि इस वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुँचेंगे और रात्रि में शिवलिंग के दर्शन और अभिषेक के लिए उपस्थित होंगे।
स्थानीय लोगों और पुरातन मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर कभी अधूरा रह गया था और इसे पूर्ण करने का श्राप माना जाता है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का विश्वास चमत्कारी घटनाओं और आस्था के कारण अटूट है। महाशिवरात्रि के दौरान यहां सुबह से ही भक्तों की कतारें लग जाती हैं। रात्रि जागरण, विधि-विधान से पूजा और बेलपत्र, धतूरा, दूध, घी और जल से अभिषेक की परंपरा यहां निभाई जाती है।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने की संभावना है। प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं और आसपास के क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं और मेडिकल सुविधा की व्यवस्था की गई है। स्थानीय व्यवसायियों और पर्यटन विभाग ने भी इस अवसर को देखते हुए तैयारियां पूरी कर रखी हैं।
स्थानीय आस्था और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में शिवलिंग पर विधिपूर्वक अभिषेक करने से मनोकामनाओं की पूर्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु रातभर जागरण करते हैं और संपूर्ण दिन व्रत रखते हैं।
सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर की विशिष्टता न केवल इसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व में है बल्कि इसके आसपास के प्राकृतिक वातावरण और पूर्णा नदी के पवित्र तट की शांति में भी निहित है। यही कारण है कि श्रद्धालु यहां दूर-दूर से आते हैं और मंदिर की इस अनोखी आस्था और अनुभव का हिस्सा बनते हैं।