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नया मोड़: नर्मदापुरम में कॉलेज प्रिंसिपल से 1 करोड़ की ठगी मामले में एक और पीड़ित सामने, कहा गोल्ड का लालच देकर 15 लाख ठगे


नर्मदापुरम । मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम होशंगाबाद में डोलरिया के एक शासकीय कॉलेज के प्रिंसिपल के साथ हुई करोड़ों की धोखाधड़ी मामले में नया मोड़ सामने आया है। पहले प्राचार्य से लगभग ₹1 करोड़ 4 लाख की ठगी का केस सामने आया था जिस पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। अब एक और व्यक्ति पीड़ित बनकर थाने पहुंचा है और उसने भी आरोप लगाया है कि इसी आरोपी ने उससे ₹15 लाख ग़लत ढंग से लेकर ठगी की है।
पहले मामले में प्राचार्य राकेश कुमार वर्मा को उनके ही ड्राइवर अंकित शर्मा ने गड़ी पड़ी सोने की पोटली का झांसा देकर झांसा दिया था। आरोपी ने कहा कि प्राचार्य के घर के नीचे जमीन में सोना दफन है जिससे वह डर गया और आरोपी को नकद ट्रांजैक्शन और गोल्ड लोन के माध्यम से 1 करोड़ 4 लाख रुपए दे दिए। बाद में पता चलने पर प्राचार्य ने शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
अब एक नया पीड़ित अमित तिवारी पुलिस स्टेशन पहुंचा है और उसने बताया कि आरोपी ने पहले उसके साथ दोस्ती बढ़ाई फिर उसे अपना जीजा बताया और धीरे-धीरे ₹15 लाख ऐंठ लिए। उसने कहा कि आरोपी ने उसे एक बॉक्स दिखाया जिसमें उसने सोना होने का झांसा दिया लेकिन असल में उस बॉक्स में सिर्फ लोहे के टुकड़े थे जिन पर सोने जैसा रंग और सिंदूर लगा था। इसी लालच में तिवारी ने करीब ₹10 लाख का लोन लिया कुछ नकद दिए और अपनी गाड़ी बेचकर बाकी रकम दी।
तिवारी ने बताया कि आरोपी का तौर-तरीका यही था कि पहले रिश्ता बनाता फिर पैसे उधार लेता और फिर लालच देकर वापस लेता रहता था। उसने कहा कि आरोपी की पत्नी और मां भी इस ठगी में शामिल थी और उन्होंने सहायता का भरोसा दिलाया कि सोना बेचकर पैसे लौटाए जाएंगे।

थाना प्रभारी कंचन ठाकुर ने पुष्टि की है कि आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया गया था और उसके कब्जे से एक स्कॉर्पियो वाहन एक बुलेट मोटरसाइकिल लगभग 30 ग्राम सोना और कुछ नकद पैसे भी जब्त किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी लोगों को गोल्ड के लालच में पैसे ऐंठ कर फिर उन्हें धोखा देता था। इसके अलावा उसने धोखाधड़ी से प्राप्त पैसों से कुछ प्रॉपर्टी भी खरीदी थी जिनके दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।

अब पुलिस तिवारी की शिकायत पर भी जांच कर रही है। मामले की जांच आगे बढ़ाई जाएगी और जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि कैसे लालच और धोखे की साजिश में लोग आसानी से फँस सकते हैं चाहे वे शिक्षित हों या साबित पद पर हों और किस प्रकार अपराधी अपनी चालाकी से बड़ा आर्थिक नुकसान करवा देते हैं।

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