CAG ने 81 वक्फ संपत्तियों की जांच की तो पता चला कि इनमें से 33 संपत्तियां लगभग 41% सरकारी रिकॉर्ड में थीं जिनका कुल क्षेत्रफल 2 09 639.48 वर्ग मीटर है। इनमें सार्वजनिक उपयोग की लिए निर्धारित रिजर्व जमीनें भी शामिल हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि कई मामलों में जिला कलेक्टरों द्वारा रजिस्ट्रेशन को रोकने या निरस्त करने के निर्देश नहीं दिए गए जिससे वक्फ एक्ट का गलत इस्तेमाल हुआ और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा संभव हुआ।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ मामलों में कलेक्टरों ने आपत्ति जताई थी लेकिन फिर भी वक्फ बोर्ड ने उन जमीनों को अपनी संपत्ति के तौर पर रजिस्टर्ड करा लिया। CAG ने साफ कहा है कि ये रजिस्ट्रेशन हाल के वर्षों में हुए हैं इसलिए इसे ‘पुरानी तकनीकी गलती’ नहीं कहा जा सकता। सरकार ने रिपोर्ट के जवाब में इसे एक ‘टेक्निकल मिस्टेक’ बताया और दावा किया कि वक्फ एक्ट में जिला प्रशासन से कोई अनिवार्यता एनओसी No Objection Certificate की नहीं है और यह कि राजस्व रिकॉर्ड के कंप्यूटरीकरण में ब्यौरा बदल गया। लेकिन CAG ने सरकार के इस उत्तर को पूरी तरह खारिज कर दिया। रिपोर्ट यह खुलासा 20 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश CAG रिपोर्ट 2018–23 का हिस्सा है।
रिपोर्ट में वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच में पाया गया कि बोर्ड के बजट का अनुचित उपयोग ऑडिट प्रक्रिया की कमी और स्टाफ की कमी जैसी अनेकों लापरवाही पाई गई हैं जिनकी वजह से इन संपत्तियों के गलत रजिस्ट्रेशन को रोका नहीं जा सका।
जिन सरकारी संपत्तियों को वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज किया गया उनमें विभिन्न जिलों के कब्रिस्तान और मस्जिद-क़िस्म की जमीनें शामिल हैं जैसे:
आगर के सुसनेर के जमुनिया गांव का हैला मुस्लिम समाज कब्रिस्तान
अनूपपुर के कोटमा का कल्याणपुर कब्रिस्तान और बिजुरी की मस्जिद रजा
बालाघाट की वक्फ अंजुमन सुन्नी हनफी मस्जिद
भिंड के मेहगांव की मजार मेवाती बाबा
भोपाल के हुजूर इलाके में स्थित कई कब्रिस्तान एवं मस्जिदें
बुरहानपुर की मदीना मस्जिद मदरसाछतरपुर एवं देवास के कुछ कब्रिस्तान और ईदगाह आदि स्थान शामिल हैं।
CAG रिपोर्ट के प्रकाश में यह मामला प्रशासनिक गैरज़रूरी प्रक्रियाओं और संपत्ति सुरक्षा में कमजोरियों को उजागर करता है। अब सवाल यह है कि सरकार और राज्य प्रशासन आगे क्या कदम उठाएंगे और क्या इन संपत्तियों के रजिस्ट्रीकरण को सही ठहराने या वापस लेने के लिये कोई व्यवहारिक मार्ग अपनाया जाएगा।