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AI के दौर में 80 लाख नौकरियों की दरकार, पी. चिदंबरम ने जताई सामाजिक विस्फोट की आशंका


नई दिल्ली । कृत्रिम मेधा एआई के तेजी से विस्तार के बीच भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार सृजन की है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने चेतावनी दी है कि देश को हर साल कम से कम 80 लाख नई नौकरियां पैदा करनी होंगी, जबकि वास्तविक आवश्यकता इससे भी अधिक हो सकती है। उनका कहना है कि आधिकारिक बेरोजगारी दर भले 5.1 प्रतिशत बताई जाती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कहीं अधिक गंभीर है। युवा बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और लगभग 55 प्रतिशत लोग स्वरोजगार या दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं, जो अस्थिर आय और असुरक्षित भविष्य का संकेत है।

चिदंबरम ने कहा कि एआई मानव क्षमताओं और उत्पादकता को कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है, लेकिन इसके साथ बड़े पैमाने पर रोजगार विस्थापन का खतरा भी जुड़ा है। उन्होंने डारियो अमोदेई के उस विश्लेषण का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि एआई अभूतपूर्व गति से श्रम बाजारों को बाधित कर सकता है और निकट भविष्य में वाइट कॉलर नौकरियों का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। टिकट चेकर, बस और ट्रेन कंडक्टर, रेल सिग्नलकर्मी, स्टेनोग्राफर, टाइपिस्ट, बैंक कर्मचारी, अनुवादक और निजी शिक्षक जैसी पारंपरिक नौकरियां स्वचालन की चपेट में आ सकती हैं।

हाल के घटनाक्रम भी इस आशंका को बल देते हैं। Microsoft के सीईओ ने संकेत दिया है कि कई भूमिकाओं में स्वचालन बढ़ेगा और कंपनी ने 2025 में हजारों कर्मचारियों की छंटनी की। इसी तरह Tata Consultancy Services ने पुनर्गठन के तहत बारह हजार से अधिक कर्मचारियों को हटाने की घोषणा की। टेक निवेशक विनोद खोसला का मानना है कि एआई के कारण आईटी सेवाएं और बीपीओ उद्योग आने वाले वर्षों में बुनियादी बदलाव से गुजरेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई को भविष्य और समृद्धि का माध्यम बताया है, लेकिन चिदंबरम का तर्क है कि भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना विकसित देशों से भिन्न है। यहां उच्चतर माध्यमिक स्तर पर नामांकन में गिरावट देखी जाती है और उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात 45-50 प्रतिशत के बीच है। अधिकांश स्नातक डिग्रीधारी रोजगार योग्य कौशल से वंचित रहते हैं, जिससे उपयुक्त नौकरी पाना कठिन हो जाता है।

उन्होंने आगाह किया कि यदि शहरी क्षेत्रों में भी रोजगार सिमटने लगे और शिक्षित युवाओं को आईटी व अन्य कुशल क्षेत्रों में अवसर न मिलें, तो सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है। समाधान के तौर पर उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण प्रबंधन में बड़े निवेश, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा, गैर-रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की समीक्षा और स्थानीय बाजारों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। एमएसएमई क्षेत्र को सबसे बड़ा रोजगार सृजक बताते हुए उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग इन उद्यमों की उत्पादकता बढ़ाने में किया जाए, न कि केवल लागत घटाने में।

चिदंबरम का निष्कर्ष स्पष्ट है तकनीक को अपनाना अनिवार्य है, लेकिन इसके साथ रोजगार सृजन की सामाजिक जिम्मेदारी भी तय करनी होगी। अन्यथा, काम से वंचित समाज असंतुलन और असंतोष की ओर बढ़ सकता है। एआई का प्रभाव आने वाले वर्षों में और स्पष्ट होगा, इसलिए अभी से ठोस नीतिगत कदम उठाने का समय है।

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