बच्चों के लिए मास्टरक्लास
फेस्टिवल का ओपनिंग सेशन बच्चों के लिए मास्टरक्लास के रूप में आयोजित किया गया। इसमें भोपाल की विभिन्न यूनिवर्सिटी के छात्र शामिल हुए और फिल्म डायरेक्शन की बारीकियां सीखीं। प्रोड्यूसर शशांक राणे के अनुसार यह मंच युवा प्रतिभाओं को पहली बार वास्तविक अनुभव देने का अवसर रहा।
फिल्म पॉलिसी और सिंगल विंडो
फेस्टिवल में अचिन जैन, यशोवर्धन मिश्रा और अशोक मिश्रा ने मध्य प्रदेश की फिल्म पॉलिसी और ‘मध्य प्रदेश की वॉयसेस’ पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि सिंगल विंडो पॉलिसी से फिल्म प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी और मदद मिल रही है, जिससे प्रदेश के टैलेंट को सही मंच मिल रहा है।
विभिन्न श्रेणियों में फिल्मों का प्रदर्शन
फेस्टिवल में फिक्शन, नॉन-फिक्शन, डॉक्यूमेंट्री और एनीमेशन फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। प्रतियोगिता के लिए चार कैटेगरी रखी गईं – जनरल फिक्शन, जनरल नॉन-फिक्शन, वीमेंस वॉइसेस और हार्ट ऑफ इंडिया। इनमें से दो श्रेणियां विशेष रूप से मध्य प्रदेश के फिल्मकारों के लिए थीं।
हुमा कुरैशी रहीं विशेष आकर्षण
बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने भी फेस्टिवल में शिरकत की। उन्होंने युवा फिल्मकारों और दर्शकों से बातचीत की और उनके काम की सराहना की।
समापन और विजेताओं की घोषणा
अंतिम दिन 20 और फिल्मों की स्क्रीनिंग हुई और फिल्म जुगनूमा के साथ समारोह का समापन हुआ, जिसमें अभिनेता मनोज वाजपेयी शामिल थे। चारों कैटेगरी के विजेताओं की घोषणा की गई:
जनरल फिक्शन: अर्पित नाग, कार्तिक महाजन, कहकशां फातिमा, परवीन कुमार यादव
वीमेंस वॉइसेस: प्राची ठाकुर, गुंजन नरूला, दिलग्रेस कौर, निधि नर्नवरे
जनरल नॉन-फिक्शन: श्रेया समवत्सर, प्रदीप लेकवार, संदीप भाटी, रोशनी चौहान
हार्ट ऑफ इंडिया: वर्षा रंसोरे, जुनैद अलावी, अपूर्व गौतम
फेस्टिवल में रनर अप और पुरस्कार राशि की जानकारी साझा नहीं की गई।
इस प्रकार, भोपाल फिल्म फेस्टिवल ने न सिर्फ युवा प्रतिभाओं को मंच दिया बल्कि शहर में सिनेमा प्रेमियों के लिए उत्सव का माहौल भी बनाया।