Jabalpur News : भोपाल। मध्यप्रदेश के जबलपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कम से कम 10 स्थायी डेरों पर रहने वाले लोग खुद को बंजारा मुस्लिम बताकर रह रहे हैं, लेकिन उनके पास न तो कोई पक्का घर है और न ही जमीन का कोई दस्तावेज। फिर भी, ये लोग आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और आयुष्मान कार्ड जैसे महत्वपूर्ण पहचान पत्र बना चुके हैं।
रोहिंग्या या बांग्लादेशी मूल के हो सकते हैं (Jabalpur News)
खुफिया तंत्र की सक्रियता से ये डेरे सामने आए, जहां करीब 1700 संदिग्ध लोग ठहरे हुए हैं। इनमें से ज्यादातर गोसलपुर, खमरिया, हनुमानताल, बरेला, गोराबाजर, भेड़ाघाट, खजरी-खिरिया बायपास, मझौली और कुंडम जैसे क्षेत्रों में फैले हैं। पुलिस का मानना है कि ये लोग रोहिंग्या या बांग्लादेशी मूल के हो सकते हैं।
फोन में नंबर नाम से नहीं अंकों में सेव (Jabalpur News)
खुफिया टीम के गोपनीय सर्वे में कई पुख्ता संकेत मिले। इन संदिग्धों की बोली और शारीरिक बनावट स्थानीय लोगों से अलग है। उनके फोन में नंबर नाम से नहीं, बल्कि अंकों जैसे 77, 102 या 999 के रूप में सेव हैं। सभी के दस्तावेज हाल ही के वर्षों में बने हैं। पूछताछ होते ही ये अपना ठिकाना बदल लेते हैं। टीम को शक है कि ये पुरानी मतदाता सूचियों (2003 की) में दर्ज मृत या बुजुर्ग लोगों को रिश्तेदार बताकर नई सूची में नाम जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय कुछ समुदायों के एजेंट भी इन्हें दस्तावेज बनवाने में मदद कर रहे हैं।
पुलिस अब इन डेरों पर नजर रख रही है और SIR प्रक्रिया में नामों की सत्यापन तेज कर दिया गया है। यह मामला अवैध घुसपैठ और वोटर फ्रॉड की आशंका को जन्म दे रहा है। जिला प्रशासन ने कहा है कि सभी संदिग्धों की पहचान और दस्तावेजों की जांच पूरी पारदर्शिता से होगी।