धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है। इसी कारण उन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और मनमोहक माना जाता है। मां सिंह पर विराजमान रहती हैं और उनके चार भुजाओं से उनका सौंदर्य और शक्ति झलकती है। उनकी एक भुजा में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं जबकि अन्य हाथों में कमल पुष्प और वरमुद्रा होती है। यह स्वरूप मातृत्व शक्ति और करुणा का अद्भुत संगम दर्शाता है।
मां स्कंदमाता को कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण पद्मासना देवी भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों और लोकमान्यताओं के अनुसार उनके सच्चे मन से पूजन करने पर संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। नि:संतान दंपतियों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ ही माता की कृपा से संतान की उन्नति और सुख समृद्धि की कामना भी पूरी होती है।
नवरात्र के इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा से भक्तों को ज्ञान बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है। यह आशीर्वाद जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। इसलिए पांचवे दिन भक्त विशेष रूप से पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करते हैं और मां के लिए कमल पुष्प फल और मिठाइयों का भोग अर्पित करते हैं। कई भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं और भजन कीर्तन के माध्यम से मां की स्तुति करते हैं।
मंदिरों में इस दिन विशेष आयोजन होते हैं। भजन कीर्तन धार्मिक कार्यक्रम और कथा सरिता के माध्यम से भक्तों का मन आध्यात्मिक अनुभव से भर जाता है। इस अवसर पर लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ मां स्कंदमाता की कृपा की कामना करते हैं और एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।
मां स्कंदमाता की भक्ति से जीवन में सुख शांति और समृद्धि का संचार होता है। माता के आशीर्वाद से मानसिक शक्ति विवेक और ज्ञान की वृद्धि होती है जिससे जीवन में हर क्षेत्र में संतुलन और सफलता मिलती है। इस दिन की पूजा से भक्त यह भी विश्वास रखते हैं कि मां की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और संतान से जुड़ी हर चिंता दूर होगी।
चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन का यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह आस्था विश्वास और समाजिक एकता का भी प्रतीक है। मां स्कंदमाता के पूजन से हर भक्त अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की आशा रखता है और मां की दिव्य कृपा को अनुभव करता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु हर वर्ष की तरह इस साल भी पूरे मनोयोग और विश्वास के साथ मां स्कंदमाता के पूजन में शामिल हुए।