गुनगुना पानी सबसे अच्छा है
यदि आपके शरीर में रूखापन, ठंडे हाथ-पैर, जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, तो यह वात दोष का संकेत हो सकता है।
गुनगुने पानी से स्नान करें
संस्थान के बाद तेल से अभ्यंग (मालिश) जरूर करें
इससे शरीर का रूखापन कम होगा और त्वचा को पोषण मिलेगा
गुनगुना पानी वात को शांति देता है और शरीर को आराम का अनुभव कराता है।
कफ प्रकृति: गर्म पानी से मिलेगा फायदा
यदि शरीर में भारीपन, सुस्ती, बार-बार सर्दी या बलगम की समस्या रहती है, तो यह कफ दोष बढ़ने का संकेत है।
गर्म पानी से स्नान करें
सुबह का समय नहाना बहुत खतरनाक है
ठंडा पानी से परहेज़, क्योंकि इससे कफ और बढ़ सकता है
गर्म पानी शरीर को सक्रिय करता है और कफ को कम करने में मदद करता है।
पित्त प्रकृति: सामान्य या ठंडा पानी सही
यदि आपको गर्मी अधिक लगती है, पसीना अधिक आता है, मुंहासे या जलन की समस्या रहती है, तो यह पित्त दोष का संकेत है।
सामान्य या साधारण ठंडे पानी से स्नान करें
बहुत ज्यादा ठंडा पानी का उपयोग न करें
इससे शरीर का सबसे अच्छा स्टॉक रहता है
यह विधि शरीर की गर्मी को शांत करती है और पित्त को नियंत्रित करती है।
स्नान से जुड़े कुछ जरूरी नियम
बहुत ज्यादा ठंडा या बहुत ज्यादा गर्म पानी रोज न लें
भोजन के तुरंत बाद स्नान न करें
सुबह स्नान करना सबसे अच्छा माना जाता है
मौसम और शरीर की स्थिति के अनुसार पानी की तापमान में गिरावट
शरीर की प्रकृति की प्रशंसा, संभवतः पूरा लाभ
आयुर्वेद के अनुसार अगर आप अपनी प्रकृति के अनुसार स्नान करते हैं, तो यह सिर्फ शरीर को साफ नहीं करता है, बल्कि कई शर्तों से भी सिखाता है।