भोपाल। मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बुधवार को लोकभवन के प्रवेश द्वार क्रमांक-2 के जीर्णोद्धार एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का लोकार्पण किया। राज्यपाल ने भारत माता के जयघोष के साथ फीता काटकर नए द्वार का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोकभवन प्रदेश की प्रशासनिक गरिमा का प्रतीक है और इसके प्रवेश द्वारों का सुव्यवस्थित तथा सुदृढ़ होना न केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि राज्य की सांस्कृतिक स्थापत्य पहचान को भी सशक्त करता है।
राज्यपाल पटेल ने संबंधित विभागों की इस परियोजना के लिए सराहना की और कहा कि राज्य की सांस्कृतिक विशिष्टताओं को ध्यान में रखते हुए द्वारों का निर्माण किया गया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सुदृढ़ और आकर्षक प्रवेश द्वार लोकभवन परिसर की प्रतिष्ठा में इजाफा करते हैं और आम जनता तथा अधिकारियों के लिए परिसर को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाते हैं। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे।
लोकभवन के प्रवेश द्वार क्रमांक-1 और 2 के जीर्णोद्धार और सुदृढ़ीकरण कार्य की कुल लागत लगभग 98 लाख 65 हजार रुपये रही। इन कार्यों में संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण, सौंदर्यीकरण और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखा गया है। इसके परिणामस्वरूप परिसर का स्वरूप और अधिक आकर्षक, व्यवस्थित और सुरक्षित हो गया है।
राज्यपाल पटेल ने अप्रैल 2025 में लोकभवन के दोनों प्रवेश द्वारों के जीर्णोद्धार के लिए भूमि-पूजन किया था और पूजा-अर्चना के साथ निर्माण कार्य की आधारशिला रखी थी। प्रवेश द्वार क्रमांक-1 का लोकार्पण पिछले वर्ष गांधी जयंती के अवसर पर किया गया था। उसके बाद क्रमांक-2 का सुदृढ़ीकरण कार्य प्रारंभ हुआ और अब उसका लोकार्पण किया गया है।
इस अवसर पर राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, विशेष कर्तव्य अधिकारी अरविंद पुरोहित, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता संजय मस्के, वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता और लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूर्ण होने से लोकभवन परिसर का स्वरूप न केवल प्रशासनिक दृष्टि से सुरक्षित हुआ है बल्कि सौंदर्य और सुविधाओं के दृष्टिकोण से भी इसे नया रूप मिला है।
राज्यपाल ने सभी अधिकारियों और कर्मियों की मेहनत की सराहना की और कहा कि लोकभवन जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्रों में संरचनात्मक और सुरक्षा संबंधी सुधार प्रदेश की प्रशासनिक छवि को मजबूत करते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में भी ऐसे विकास कार्यों के माध्यम से लोकभवन और अन्य सरकारी परिसरों का स्वरूप और अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनेगा।