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ईरानी हमले में अमेरिकी THAAD डिफेंस सिस्टम क्षतिग्रस्त, जॉर्डन का रडार तबाह; अमेरिका को बड़ा सैन्य और आर्थिक नुकसान



नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने सऊदी अरब, UAE और जॉर्डन में तैनात अमेरिकी टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम को निशाना बनाया। जॉर्डन के ‘मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस’ पर तैनात THAAD का रडार सिस्टम पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यह रडार सिस्टम THAAD का सबसे अहम हिस्सा है, जो दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों की पहचान और ट्रैकिंग करता है।

एक पूरे THAAD सिस्टम की कीमत लगभग ₹22 हजार करोड़ होती है, जबकि केवल रडार सिस्टम की कीमत ही 2,700 करोड़ रुपए (लगभग 300 मिलियन डॉलर) तक है। अमेरिका के पास वैश्विक स्तर पर केवल 7-8 ऐसे सिस्टम हैं, इसलिए यह हमला उनके लिए गंभीर सैन्य और आर्थिक नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। THAAD सिस्टम का नुकसान अमेरिका के क्षेत्रीय डिफेंस नेटवर्क पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

इस बीच, ईरान का युद्धपोत IRIS लावन भारत के कोच्चि बंदरगाह पर रुका हुआ है। तकनीकी खराबी के कारण 28 फरवरी को ईरान ने भारत से मदद मांगी थी, और भारतीय नौसेना ने 1 मार्च को इसे डॉक करने की अनुमति दी। जहाज पर मौजूद 183 क्रू मेंबर फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं। यह युद्धपोत हाल ही में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR 2026) और मिलान 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था। इससे पहले अमेरिका ने भारत लौट रहे ईरानी युद्धपोत IRIS देना को श्रीलंका के पास हमला कर डुबा दिया था, जिसमें 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए थे।

इजराइल ने भी ईरानी सेना के एयरफोर्स कमांड सेंटर पर हमला किया। इजराइली सेना ने दावा किया कि इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण स्थल, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य गोदाम को निशाना बनाया गया। यह हमला ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने और क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

UAE के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed Al Nahyan ने कहा कि देश युद्ध जैसी स्थिति से गुजर रहा है, लेकिन वह अपने लोगों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि UAE कमजोर नहीं है और किसी भी देश को आसानी से निशाना बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

साथ ही, ईरान ने बताया कि अमेरिका ने केशम आइलैंड पर स्थित पानी की सफाई प्लांट पर हमला किया, जिससे लगभग 30 गांवों में पीने के पानी की सप्लाई ठप हो गई। ईरान ने इस हमले को गंभीर और खतरनाक कदम बताया, जिससे क्षेत्रीय संकट और गहरा गया।

मध्य-पूर्व में बिगड़ते हालात के बीच जर्मनी ने क्षेत्रीय देशों की मदद के लिए 100 मिलियन यूरो (लगभग 972 करोड़ रुपए) की सहायता देने की घोषणा की। यह धन उन लोगों की मदद के लिए होगा जिन्हें लड़ाई के कारण अपने घर छोड़ने पड़े हैं।

इस पूरी स्थिति के बीच अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष तेज होता जा रहा है। THAAD सिस्टम के नुकसान से अमेरिकी सुरक्षा नेटवर्क कमजोर हो सकता है, जबकि क्षेत्रीय देशों के नागरिकों के लिए खतरा लगातार बढ़ रहा है। मध्य-पूर्व में यह संघर्ष वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है।

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