Mahakaushal Times

MP NEWS : जबलपुर सर्राफा बाजार का विश्लेषण: 40 हजार की कीमत फिर भी कम डिमांड, क्या 9 कैरेट सोना सिर्फ एक दिखावा है?

 
MP NEWS : जबलपुर/ भारतीय समाज में सोना खरीदना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। यही कारण है कि जब भी सोने की बात आती है, तो शुद्धता प्योरिटी सबसे बड़ा पैमाना होती है।
हाल के दिनों में बाजार में 9 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी एक सस्ते विकल्प के रूप में उभरी है, लेकिन जबलपुर सहित देश के अन्य सर्राफा बाजारों में इसकी चमक फीकी पड़ती दिख रही है।
मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए करीब 40 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की आकर्षक कीमत होने के बावजूद, लोग इसे शादी-ब्याह और निवेश जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर अपनाने से कतरा रहे हैं।
MP NEWS : ट्रेन में मारपीट मामले में सीटीआई निलंबित, अलग घटना में रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर पर चाकू से हमला

जबलपुर के अनुभवी सर्राफा व्यापारी अजीत जैन के अनुसार, 9 कैरेट सोने की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी संरचना में छिपी है। तकनीकी रूप से देखें तो 9 कैरेट गोल्ड का अर्थ है कि उस आभूषण में मात्र 37.5 प्रतिशत शुद्ध सोना है, जबकि शेष 62.5 प्रतिशत हिस्सा मिश्र धातु अलॉय का होता है।

हालांकि, यह सोना भी अब BIS-हॉलमार्क के अंतर्गत आता है और सरकारी मानकों पर खरा उतरता है, लेकिन सोने की मात्रा इतनी कम होने के कारण यह पारंपरिक सोने 22K या 24K जैसा अनुभव नहीं दे पाता।

व्यापारियों का कहना है कि 9 कैरेट गोल्ड के रंग और चमक को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें आ रही हैं। इसमें मिश्र धातु की मात्रा अधिक होने के कारण कुछ समय बाद इसका पीलापन हल्का पड़ने लगता है और यह दिखने में असली सोने जैसा नहीं लगता। यदि इसे ठीक से मेंटेन न किया जाए, तो यह काला भी पड़ सकता है। यही वजह है कि ग्राहक इसे खरीदने के बाद पछतावे से बचने के लिए अभी भी 22 या 18 कैरेट के आभूषणों पर ही भरोसा जता रहे हैं।

निवेश के दृष्टिकोण से भी 9 कैरेट गोल्ड एक ‘फेल’ सौदा साबित हो रहा है। जब कोई व्यक्ति सोना खरीदता है, तो उसकी उम्मीद होती है कि भविष्य में उसे उस पर अच्छा रिटर्न मिलेगा। लेकिन 9 कैरेट सोने में शुद्ध सोने की मात्रा कम होने की वजह से री-सेल वैल्यू दोबारा बेचने पर मिलने वाली कीमत काफी कम होती है।

लोग पूछते जरूर हैं, लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि इसमें 60 फीसदी से ज्यादा अन्य धातुएं हैं, तो वे निवेश के लिए वापस 24 या 22 कैरेट की ओर मुड़ जाते हैं।

वर्तमान में 9 कैरेट गोल्ड की मांग केवल बड़े शहरों में कुछ फैशनेबल और ‘डेली वियर’ ज्वेलरी तक सीमित है। शादियों और त्योहारों के सीजन में, जहाँ प्रतिष्ठा और शुद्धता का महत्व होता है, वहाँ यह सस्ता सोना अपनी जगह बनाने में नाकाम रहा है। अंततः, भारतीय ग्राहकों के लिए सोना आज भी वही है जो बरसों तक अपनी चमक और कीमत दोनों बरकरार रख सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर