JPSC Protest Update: सरकार से वार्ता को तैयार छात्र, लेकिन दो शर्तों पर अड़े; CBI-ED जांच की मांग बरकरार
झारखंड में JPSC भर्ती परीक्षा विवाद पर छात्रों का आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे संवाद और बैठक में मीडिया की मौजूदगी जैसी दो अहम शर्तें रखी हैं। वहीं CBI और ED जांच की मांग पर छात्र अब भी अडिग हैं।
रांची। झारखंड में JPSC और बाकि भर्ती परीक्षाओं को लेकर कथित अनियमितताओं वाला मामला, छात्रों के आंदोलन के साथ साथ बढता ही जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार से बातचीत करने की हां तो भर दी है, पर वो भी दो खास शर्तों के साथ , थोड़ा सा सख्त अंदाज में। छात्रों का कहना है कि बातचीत सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ हो, और बैठक के दौरान कम से कम दो मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहें। उनके मुताबिक, भर्ती परीक्षा के विवाद पर, साफ़ संवाद और स्पष्ट उत्तर ही अभ्यर्थियों का भरोसा वापस ला सकता है।
सरकार के प्रस्ताव पर छात्रों ने जताई आपत्ति
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने बताया कि बुधवार को एसडीओ आंदोलन वाले स्थल पर सरकार का प्रस्ताव लेकर पहुंचे थे, और छात्र प्रतिनिधिमंडल के लिए आने वाले सदस्यों के नाम पूछे गए। उसके बाद वार्ता की तारीख तय करने की बात भी कही गई। मगर छात्रों का आरोप ये है कि सिर्फ पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तक बातचीत सीमित रखना आंदोलन को, कमजोर करने वाली चाल हो सकती है। उनका कहना है कि ये लड़ाई सिर्फ किसी एक वर्ग की नहीं बल्कि पूरे राज्य के अभ्यर्थियों की है, इसलिए बातचीत भी सबकी भावनाओं को साथ लेकर होनी चाहिए।
13वें दिन भी जारी रहा आंदोलन और अनशन
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना 13वें दिन पर भी रुका नहीं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत छह छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़े हैं कि 14वीं JPSC परीक्षा की जांच CBI और ED से कराई जाए। उनका कहना है कि सिर्फ CID से जांच होना पर्याप्त नहीं है। इसी दौरान CID ने मामले में पांच और आरोपियों को हिरासत में लिया है, और अब तक कुल 19 गिरफ्तारी हो चुकी बताई जा रही है।
परीक्षा विवाद के बाद आंदोलन की रफ्तार बढ़ी
14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद, चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद तेज हो गया। अभ्यर्थियों ने कट-ऑफ अंक सार्वजनिक न करने, कथित OMR शीट वायरल होने और परिणाम से जुड़े अन्य पहलुओं पर सवाल खड़े किए। विवाद का असर ये हुआ कि आयोग ने मुख्य परीक्षा रद्द कर दी। फिर तो छात्रों का आंदोलन और ज्यादा जोर पकड़ने लगा, और निष्पक्ष जांच की मांग लगातार सुनाई देती रही।
मांगों पर फैसला होने तक आंदोलन रहेगा, जारी ही
प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की जांच CBI और ED से कराई जाए, साथ में फास्ट ट्रैक कोर्ट भी बने। ये भी कहा जा रहा है कि TDPL से कराई गई परीक्षाएं रद्द की जाएं, और कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाए। भविष्य की परीक्षाएं किसी भरोसेमंद एजेंसी के जरिए जैसे TCS के माध्यम से कराने की बात भी उनके एजेंडे में है। साथ ही भ्रष्टाचार के आरोपों पर, JPSC और JSSC के अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी हो रही है। अभी सरकार और छात्रों के बीच वार्ता की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन छात्र अपनी मुख्य मांगों से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं, बिल्कुल साफ़ साफ़।
