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भोपाल स्कूल में भय का माहौल, 600 से ज्यादा छात्र छोड़ चुके स्कूल


भोपाल ।
पंचशील नगर स्थित शासकीय नूतन सुभाष उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं और छात्रों के लिए सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। सालों से प्रतिष्ठित यह स्कूल अब असुरक्षा और भय के माहौल में संघर्ष कर रहा है। पहले यहां करीब 800 छात्र पढ़ते थे, लेकिन अब संख्या घटकर लगभग 200 रह गई है।

स्कूल के आसपास नशाखोरों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। छात्राएं और स्थानीय लोग बताते हैं कि रोजाना नशे में धुत लोग गेट के पास फब्तियां कसते हैं, आवाजें लगाते हैं और छेड़छाड़ करते हैं। छात्रा अनन्या ने बताया कि रास्ते में नशाखोरों की वजह से हर दिन डर के साए में गुजरता है। छात्रा निशा ने भी बताया कि कभी-कभी लड़के कमेंट पास करते हैं और एक बार तो बदतमीजी की कोशिश भी हुई, लेकिन शिक्षिका के आने पर वे भाग गए।

छात्र शुभम ने बताया कि स्कूल में लगभग 40 दृष्टिहीन छात्र पढ़ते हैं, जो रोजाना 1 से 1.5 किमी पैदल आते हैं और कई बार बदसलूकी का सामना करते हैं। ऐसे माहौल में पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो गया है।

स्कूल परिसर में भी सुरक्षा गंभीर समस्या बनी हुई है। प्रिंसिपल डॉ. अभिषेक बैस ने बताया कि एक साल पहले कुछ लोग स्कूल में घुसे और बाथरूम में एक व्यक्ति की हत्या कर शव जला दिया। यहां तलवार और महिलाओं के कपड़े भी मिल चुके हैं। कई बार स्कूल के गेट के ताले तोड़ दिए गए, बेंच उठाई या तोड़ी गईं, और छात्रों से चाकू दिखाकर पैसे लूटे गए।

स्कूल के बाहर का माहौल भी भयावह है। मीट शॉप्स, बार्बर शॉप्स और शराब पीने वाले लोग स्कूल के पास जमा रहते हैं। केवल 100 मीटर के दायरे में पूरा क्षेत्र नशाखोरी का केंद्र बन चुका है। छात्राएं और महिलाएं स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि अतिक्रमण और असामाजिक गतिविधियों के कारण स्कूल परिसर तक सुरक्षा की गंभीर कमी है।

इस भयावह माहौल के कारण पिछले दो साल में 600 से ज्यादा छात्र-छात्राएं स्कूल छोड़ चुके हैं। छात्राओं की संख्या घटकर महज 12–15 रह गई है। जो बच्चे आते हैं, उनका ध्यान पढ़ाई पर कम और सुरक्षा पर ज्यादा रहता है।

पुलिस ने कहा है कि क्षेत्र स्लम है और यहां असामाजिक गतिविधियां होती रहती हैं। टीटी नगर थाना प्रभारी गौरव सिंह ने बताया कि पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है और स्कूल प्रबंधन को संपर्क नंबर दिए गए हैं। हालांकि, अभिभावक और शिक्षक मानते हैं कि मौखिक शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

प्रिंसिपल बैस का कहना है कि कभी प्रतिष्ठित रहा यह स्कूल अब अपनी पहचान बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। शराबी और असामाजिक तत्व दिन और रात परिसर में घुस आते हैं। शिकायतें विधायक, कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

यह स्थिति स्कूल के अस्तित्व और छात्रों की सुरक्षा पर सीधा असर डाल रही है। अभिभावक डरते हैं कि यदि उन्होंने स्कूल की स्थिति उजागर की तो बच्चों को स्कूल से हटवा दिया जाएगा। ऐसे में पढ़ाई और सुरक्षित शिक्षा का अधिकार गंभीर संकट में है।

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