नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच ग्लोबल क्रूड मार्केट में बड़ी तेजी देखने को मिल रही है। इजरायल ने दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल और नेचुरल गैस फील्ड साउथ पार्स पर हमला किया है। इसके बाद ब्रेंट क्रूड के दाम 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। अमेरिकी क्रूड (WTI) भी 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है।
साउथ पार्स पर हमला और उसके असर
इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल दागी। एक मिसाइल सीधे लक्ष्य पर लगी जबकि चार को बीच में ही रोका गया। रास लाफान दुनिया की सबसे बड़ी LNG प्रोडक्शन साइट है जो इस महीने की शुरुआत से बंद पड़ी थी। हमले से काफी नुकसान हुआ है।
साउथ पार्स गैस फील्ड ईरान की घरेलू गैस सप्लाई के साथ पड़ोसी देशों इराक और टर्की को भी गैस भेजता है। हमले में असलुयेह के ऑयल और पेट्रोकेमिकल प्लांट्स को भी नुकसान पहुंचा है। यह फील्ड ईरान और कतर के बीच बंटा हुआ है और दुनिया के सबसे बड़े नेचुरल गैस भंडार का करीब एक-तिहाई हिस्सा है।
ब्रेंट क्रूड और गैस में उछाल
एशियाई ट्रेडिंग में गुरुवार सुबह क्रूड ऑयल 112 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिकी नेचुरल गैस में भी 5% की तेजी आई है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हमले जारी रहे तो क्रूड की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
भारत पर असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी निर्भर है। देश का लगभग 85-90% क्रूड आयात इसी क्षेत्र से आता है जिसमें 45-50% सीधे मिडिल ईस्ट से है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और सप्लाई बाधित होने से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना है।
महंगाई पर असर
क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पेट्रोल-डीजल ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स और घरेलू LPG सिलेंडर के दाम पर पड़ेगा। स्टोरेज सीमित होने और सप्लाई बाधित होने से शॉर्टेज का खतरा भी है जिससे आम परिवारों की जेब पर दबाव बढ़ सकता है।