Bhopal Gas Tragedy : भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी पर भारत टाकीज ब्रिज से यूनियन कार्बाइड प्लांट तक निकाली गई विरोध रैली ने धार्मिक तनाव को नया मोड़ दे दिया। रैली में डाउ केमिकल कंपनी (डाउ) के पुतले के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का पुतला भी ले जाया गया था। जिसे यूनियन कार्बाइड स्थल पर जलाने की योजना थी। पुलिस ने रैली को महज 10 मीटर दूर ही रोक दिया और RSS पुतला जब्त कर लिया। इस घटना पर हिंदू संगठनों ने भारी विरोध जताया है।
RSS पुतले को शामिल करने से विवाद (Bhopal Gas Tragedy) :
रैली का आयोजन भोपाल गैस पीड़ित संगठनों ने किया था, जो 3 दिसंबर 1984 की त्रासदी की याद में मोमबत्ती मार्च और न्याय की मांग कर रहे थे। संगठनों का कहना है कि पुतला डाउ कंपनी के खिलाफ था, जो यूनियन कार्बाइड की उत्तराधिकारी है, लेकिन RSS पुतले को शामिल करने से विवाद खड़ा हो गया। हिंदू संगठनों ने इसे “सनातन विरोधी साजिश” बताते हुए कहा कि गैस कांड के नाम पर धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ हो रहा है।
त्रासदी के पीड़ितों का अपमान है (Bhopal Gas Tragedy) :
पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और रैली को शांतिपूर्ण रखा। RSS ने राज्य सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह त्रासदी के पीड़ितों का अपमान है। एक ओर पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए, दूसरी ओर राजनीतिक साजिशों का शिकार न बनना चाहिए।
भोपाल गैस त्रासदी में 5,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और लाखों प्रभावित हुए थे। 41 वर्ष बाद भी मुआवजा और इलाज की मांगें अधूरी हैं। रैली में पीड़ितों ने “भोपाल का इंसाफ करो” के नारे लगाए, लेकिन RSS पुतले ने मुद्दे को सांप्रदायिक रंग दे दिया। प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है।