Balaghat Naxal Encounter : बालाघाट। मिशन 2026 की डेडलाइन नजदीक आते ही माओवादियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे बालाघाट-खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) सीमा के माताघाट जंगल में हॉक फोर्स और DRG की संयुक्त टीम के साथ माओवादियों की मुठभेड़ हो गई। गोलीबारी के बाद माओवादी अपना डेरा छोड़कर भाग निकले।
सुरक्षाबलों ने डेरा तलाशी लिया तो बड़ी मात्रा में सामान बरामद हुआ (Balaghat Naxal Encounter) इसमें विस्फोटक और डेटोनेटर, दवाइयां और मेडिकल किट
– राशन, बर्तन और दैनिक उपयोग की चीजें, माओवादी साहित्य शामिल है।
SP आदित्य मिश्रा ने पुष्टि की: “माओवादियों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं, लेकिन वे भाग खड़े हुए। डेरा छोड़ने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है।”
ग्रामीणों ने बंद किया सहयोग (Balaghat Naxal Encounter)
SP ने बताया कि अब गांवों से माओवादियों को कोई मदद नहीं मिल रही। राशन-दवा तक मुश्किल हो गई है। लोग अच्छे-बुरे में फर्क समझ चुके हैं और सहयोग करने से इनकार कर रहे हैं। यही वजह है कि माओवादी एक जगह टिक नहीं पा रहे, बार-बार डेरा बदल रहे हैं। पिछले एक महीने में बालाघाट में 18 कुख्यात माओवादियों ने सरेंडर किया है। SP ने फिर अपील की: “जो बचे हैं, उनके पास अभी भी समय है – हथियार डालकर मुख्यधारा में लौट आएं, वरना सख्त कार्रवाई होगी।”
सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। माना जा रहा है कि माओवादी अब छत्तीसगढ़ की ओर खिसक रहे हैं। बालाघाट को 2026 तक नक्सल-मुक्त करने का लक्ष्य तेजी से पूरा होता दिख रहा है।