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Balaghat Naxal Surrender : बालाघाट में 12 साल बाद महिला माओवादी का आत्मसमर्पण

Balaghat Naxal

Balaghat Naxal Surrender : बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले को माओवादी विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ की तर्ज पर बालाघाट में भी माओवादियों ने आत्मसमर्पण करना शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, जिले में 12 साल बाद किसी माओवादी का सरेंडर हुआ है।

बीजापुर (छत्तीसगढ़) की रहने वाली महिला माओवादी सुनीता ने बालाघाट पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं। सुनीता फरवरी 2025 से बालाघाट क्षेत्र में सक्रिय थी और अपने दलम के लीडर रामधेर की गार्ड के रूप में काम कर रही थी।

सरेंडर प्रक्रिया जारी, पुलिस को बड़ी सफलता

सुनीता दलम में एमएमसी (MMC) मेंबर के रूप में सक्रिय थी। बालाघाट रेंज के आईजी संजय कुमार ने महिला माओवादी के आत्मसमर्पण की पुष्टि की है। उनके अनुसार, सुनीता के सरेंडर की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। पुलिस इस सफलता को ‘मिशन 2026’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।

2013 के बाद पहला आत्मसमर्पण

गौरतलब है कि बालाघाट में इससे पहले आखिरी बार साल 2013 में मलाजखंड टाडा दलम के माओवादी बीरसिंह उर्फ मुक्का ने पुलिस के सामने सरेंडर किया था।

पुलिस अब माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने हेतु एक विशेष रणनीति अपना रही है। इसके तहत, छत्तीसगढ़ के आत्मसमर्पण कर चुके शीर्ष माओवादी लीडर्स की फोटो लगाकर उन्हें प्रोत्साहित करने का काम किया जा रहा है।

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