– प्राकृतिक सुंदरता और संपदाओं से भरा पड़ा है जिला
– गोंड राजाओं से लेकर ब्रिटिश सरकार ने किया राज
Balaghat News : बालाघाट. मध्यप्रदेश का बालाघाट जिला आज समृद्धि की ओर अपने कदम बढ़ा रहा है. जिले का शुरुआत नाम बलाघाट था, लेकिन बाद में बदलकर बालाघाट हुआ. यह जिला प्राकृतिक सुंदरता और संपदाओं से भरा पड़ा है. जिले में प्राकृतिक संपदाओं की वजह से देश ही नहीं विदेशों में इस जिले की खास पहचान है. इतिहासकारों के मुताबिक जिले की धरती पर गोंड शासकों के साथ अंग्रेजी सरकार ने भी शासन किया है. उस दौर की कई धरोहरें आज भी मौजूद हैं, इन धरोहरों को देखने के लिए देश भर के पर्यटक बालाघाट आते हैं, यह धरोहरों बालाघाट को पूरे देश में पहचान दिलाती है.
इतिहासकारों के अनुसार जिले का नाम पहले बलाघाट था, जिसका अर्थ था कि यह घाटों के ऊपर बसा हुआ था, इसलिए इसे बलाघाट नाम दिया गया था. साल 1867 में अंग्रेजी शासनकाल में छिंदवाड़ा, सिवनी और मंडला जिले के मिलाकर प्रशासनिक इकाई बनाया हुआ था. साल 1872 में इसका पुर्नगठन किया गया और नाम भी बदला गया. पुर्नगठन के साथ ही इसका नाम बलाघाट से बदलकर बालाघाट किया गया, जो आज भी प्रचलित है.
गोंड-मराठा राजाओं के रहा अधीन
इतिहास के मुताबिक बालाघाट की धरती पर शुरुआत में गोंड राजाओं ने शासन किया, जबकि बाद में मराठा राजाओं ने भी यहां शासन किया है. इतिहास के मुताबिक 18वीं शताब्दी तक गोंड राजाओं का शासन रहा, जबकि इसके बाद 18वीं शताब्दी में ही मराठाओं के अधीन यहां की धरती आ गई, जबकि 18वीं शताब्दी में अंग्रेजों का शासन हो गया, जो देश की आजादी तक रहा.
अंग्रेजों ने पहचानी यहां की पुरा संपदा
19वीं शताब्दी से इस धरती पर अंग्रेजी सरकार ने नियंत्रिण किया, अंग्रेजी शासन ने इस धरती पर छिपी पुराना संपदाओं को पहचाना और विशाल मैंगनीज और तांबे के भंडारों का पता लगाया एवं उनका दोपहर किया. इस दौरान मलाजखंड में एशिया की सबसे बड़ी तांबे की खुली खदान की स्थापना हुई. जिसने बालाघाट को देश में ही नहीं विदेशों में पहचान दी.
आजादी के बाद से प्रगति के पथ पर अग्रेसर
देश की आजादी 1947 के बाद से बालाघाट जिला मध्यप्रदेश का अभिन्न अंग बन गया, तबि से लेकर यहां जिला निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर होता चला जा रहा है. यह जिला कृषि और खनिज संपदा के मामले में निरंतर आगे बढ़ रहा है. जिले को आर्थिक रूप से समृद्ध भी कर रहा है. कृषि क मामले में जिले को अनूठी पहचान मिली है. यहां चावल की पैदावार बहुतायात में होती है, इसलिए जिले को धान का कटोरा भी कहा जाता है. हालांकि दुखद यह है कि निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढऩे के बावजूद जिले में शिक्षा और बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है.
जिले की वर्तमान स्थिति
साल 2011 की जनगणना के अनुसार बालाघाट जिले की आबादी 17 लाख थी, हालांकि इस जनगणना के 14 साल बीत गए हैं, अब जनसंख्या के आंकड़े में इजाफा हो गया है. जिले में कुल 1215 गांव हैं, जबकि 10 तहसीलों में यह जिला बटा है. इन तहसीलों में बालाघाट, लालबर्रा, कटंगी, बुरहा, बैहर, लांजी, परसवाड़ा, किरनापुर, खैरलांजी और तिरोड़ी शामिल हैं.

देश भर में प्रसिद्ध है लांजी का किला, रामपायली मंदिर
बालाघाट जिले में अनेक ऐतिहासिक धरोहरे हैं, जो पूरे देश भर में बालाघाट को पहचान दिलाती है. इन ऐतिहासिक धरोहरों में लांजी का किला एवं रामायपाली का मंदिर शामिल हैं. इसके अलावा भी जिले में अनेक ऐतिहासिक धरोहरें हैं. इन धरोहरों को देखने के लिए मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश भर से पर्यटक बालाघाट पहुंचते हैं. इसके अलावा औद्योगिक पुरा संपदाओं से जुड़ाव होने की वजह से यहां देश भर के बड़े-बड़े उद्योगपतियों के आने जाने का सिलसिला बना रहता है.